मऊ। कोरोना संक्रमण के बीच मौसम के बदलते मिजाज में से आए दिन बच्चे, बड़े बुजुर्ग वायरल फीवर के साथ कई मौसमी बीमारियों के शिकार हो रहें है। करण कभी तेज धूप तो कभी ऊमस भरी गर्मी और कभी तापमान में होने वाली गिरावट से लोग बीमारी का शिकार हो रहें। लेकिन संक्रमण के बीच मौसमी बीमारियों की चपेट में आने के बाद भी लोग भयभीत होकर उपचार करने के लिए जिला अस्पताल कम जा रहें। इसका अंदाजा बीते वर्ष की ओपीडी से तुलना कर लगाया जा सकता है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों आने वाले मरीजों में औसतन 200 से ज्यादा मरीज मौसमी बीमारियों से पीड़ित निकल रहे हैं। लेकिन अस्पताल में मरीजों के उपचार के नाम पर कोई विशेष सुविधा नही है। दूसरे बीमार होने के बाद इस लिए मरीज अस्पताल उपचार कराने नहीं पहुंच रहें। क्योंकि मरीजों को डर है कि अस्पताल जाने पर उनका काविड जांच कराया जाएगा। यदि पॉजिटिव निकले तो उन्हें उपचार के लिए एल-1 अस्पताल भेजा दिया जाएगा। फिलहाल बीते वर्ष इस माह में जिला अस्पताल में पांच से छह सौ की ओपीडी होती थी। इस क्रम में जिले के कोपागंज, घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना, रतनपुरा, दोहरीघाट,फतेहपुर मंडाव आदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना 50 से ज्यादा मरीज उपचार कराने के लिए पहुंचते है। इन मरीजों में 40 से लेकर 50 फीसदी मरीज सर्दी, बुखार, जुकाम, खांसी टायफाइड आदि मौसमी बीमारियों से ग्रसित होने पर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
वरिष्ठ फीजिशियन डा. योगेंद्र कुमार कहते हैं कि सर्दी जुकाम खांसी वाले लक्षणों को कोरोना से अलग करना इस समय कुछ मुश्किल हो रहा है। ऐसे लक्षण दिखने पर कोरोना जांच के साथ ही योग्य चिकित्सक की सलाह लेने में देरी न करें।यथा संभव गरम पानी और सुुपाच्य खाद्य पदार्थों का सेवन करें। कोविड -19 की गाइड लाइन का पालन करें। वैसे पिछले सालों की अपेक्षा अभी मौसमी बीमारियों के मरीज कम आ रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बीमारियों से संबंधित दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं।सरकारी अस्पतालों के डाक्टर एक ही प्रकार की दवाइयां हर मरीज को लिख दे रहे हैं। वैसे अधिकारी तो दावा करते हैं कि अस्पताल में दवाईयां हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में तैनात डाक्टर रोजाना ड्युटी पर नहीं जाते हैं। इसके साथ ही इन अस्पतालों में दवाइयां भी नाम मात्र की मिलती हैं,इसलिए मरीज इन अस्पतालों का रुख ही नहीं करते। इसके अलावा एक तरह की दवा लगभग गई तरह के रोगियों को डाक्टर देते है। सर्दी जुकाम से पीड़ित धवरियासाथ से आई कलावती, बुखार से पीड़ित चकिया से आए प्रेम , भूख न लगने और सांस फूलने से पीड़ित रघुनाथपुरा से आए मु. इस्माइल और सीने और रीढ़ की हड्डी के दर्द से पीड़ित थलईपुर से आई सुषमा राय ने बताया कि डाक्टर एक ही प्रकार की दवाइयां हर मरीज को लिख रहे हैं।
मऊ के सीएमओ डॉ. एससी सिंह ने बताया कि अस्पतालों में इन दिनों मौसमी बीमारियों से संबंधित सभी अवश्यक दवाईयां पर्याप्त मात्रा में हैं। वैसे इस साल अभी तक मौसमी बीमारियों के मरीज पिछले सालों की तुलना में कम आ रहे हैं।