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Mau News: अब दो बार की परीक्षा में पास हुए तभी मिलेगी वाहन चलाने की अनुमति

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मऊ। अब नए नियम के तहत वाहन चालकों के लाइसेंस जारी होंगे और कुशल चालक प्रमाणपत्र के लिए दो बार परीक्षा से अभ्यर्थियों को गुजरना पड़ेगा। इसके बाद प्रमाणपत्र मिल सकेगा।
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शासन ने ड्राइविंग स्कूलों को नई सुविधाओं के साथ खोलने का निर्देश दिया है। जब तक नए लाइसेंस जारी नहीं होते हैं, तब तक ड्राइविंग नहीं सीख सकते हैं। अगर सीख रहे हैं और कोई प्रमाणपत्र देने का दावा कर रहा है तो सचेत हो जाएं। जनपद में 10 ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल पंजीकृत थे। लेकिन विभाग की तरफ से तय मानक को पूरा न करने पर शासन स्तर से गठित टीम में जांच में नौ ड्राइविंग लाइसेंस को रद्द कर दिया था।
अब जिले में मात्र एक ड्राइविंग स्कूल से ही भारी व हल्के वाहन को चलाने के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है। काफी प्रयास करने के बाद भी सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। बड़े और चार पहिया वाहन से लगातार हादसे हो रहे हैं। जबकि कुशल व्यक्ति ही वाहन चलाए, इसके लिए जिले में शासन की ओर से ड्राइविंग स्कूल का लाइसेंस निर्गत किया गया है। बावजूद इसके सड़क हादसों में कमी नहीं आ रही है। इन हादसों को देखते हुए शासन ने माना है कि बिना ट्रैक और प्रशिक्षण के स्कूलों की ओर से कुशल चालक प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जा रहा है। इसका नतीजा है कि हादसे पर हादसे हो रहे हैं।
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इसलिए शासन ने ड्राइविंग स्कूलों के नियम में बड़ा बदलाव किया है। ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में व्याख्यान कक्ष, सेमुलेटर कक्ष, मॉडल चार्ट व उपकरण आदि के लिए कितनी जगह होनी चाहिए इसे बताया गया है। इसमें पहले ट्रेनिंग स्कूल में एक छोटे आकार के चार पहिया वाहन पर ट्रायल कराएंगे। यहां मोड, गति और अचानक आने वाले वाहन से कैसे बचें, इसके बारे में प्रशिक्षित करेंगे। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कार, ट्रक और जेसीबी आदि सड़क और निश्चित स्थान पर चलवाएंगे। इसके बाद कुशल चालक का प्रमाण पत्र जारी कर सकेंगे। नए मोटर ड्राइविंग स्कूल में पहली बार प्रशिक्षण के लिए आने वाले वाहन 12 वर्ष से अधिक पुराने नहीं होने चाहिए। यह 20 वर्ष तक ही चलेंगे। ड्राइविंग स्कूल संचालकों द्वारा नियमों के मुताबिक सभी सावधानियों का पालन करना होगा। अब नए नियम के तहत वाहन चालकों के लाइसेंस जारी होंगे और कुशल चालक प्रमाणपत्र के लिए दो बार परीक्षा से अभ्यर्थियों को गुजरना पड़ेगा। इसके बाद प्रमाणपत्र मिल सकेगा।



ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल का है मानक
संरचना कक्षा, स्वागत कक्ष, कार्यालय, इंटरनेट कनेक्शन, कंप्यूटर व प्रिंटर, क्षेत्रफल 180 वर्ग फीट, व्याख्यान कक्ष 30 व्यक्तियों की क्षमता का फर्नीचर, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर युक्त, 300 वर्ग फीट माडल चार्ट व उपकरण, 300 वर्ग फीट मुलेटर कक्ष हल्के और भारी, 150-200 वर्ग फीट। ट्रेनिंग स्कूल के वाहनों में दोनों तरफ ट्रेनिंग स्कूल का नाम, पता, थाना, मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए। रिफ्लेक्टिव टेप लगा होना चाहिए। वाहन में पंजीयन, प्रदूषण, बीमा, फिटनेस, रोड टैक्स प्रमाणपत्र के साथ प्रशिक्षक का ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।


कोट
ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के मानकों में शासन की ओर से बदलाव किया गया है। कुशल चालक प्रमाणपत्र के लिए दो बार परीक्षा से अभ्यर्थियों को गुजरना पड़ेगा। इसके बाद प्रमाणपत्र मिल सकेगा। मानक को पूरा न करने वाले नौ ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों का लाइसेंस रद्द हो गया है। नए तरीके से लाइसेंस जारी होंगे और मानक पूरा करने पर संचालन हो पाएगा। - सुहेल अहमद, एआरटीओ, मऊ
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