जनपद भदोही में वाराणसी-इलाहाबाद रेल मार्ग पर ट्रेन से कार की टक्कर में तीन लोगों की मौत के बाद मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर सुरक्षा बड़ा सवाल बन गई है।
आए दिन मानव रहित क्रासिंग पर हो रहे रेल हादसों के बाद भी रेलवे सबक नहीं ले रहा। लगभग छह महीने पहले जनपद में महासो रेल हादसे में 8 बच्चों की जान चली गई।
लेकिन यहां पर भी रेलवे फाटक नहीं चालू किया जा सका। जबकि रेल मंत्री से लेकर रेलवे के अधिकारियों ने इसे 24 घंटे के अंदर चालू करने का निर्देश दिया था। जनपद में 28 मानव रहित क्रासिंग हैं जहां पर मौत का खतरा प्रतिदिन बना रहता है।
जिले में छोटी बड़ी लाइनों को मिलाकर 28 मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं। जिले के चकरा, बस्ती, महासो, कोलौरा, कुशमौर आदि स्थानों पर प्रतिदिन रेलगाड़ियों के गुजरने पर लोगों को रेल हादसे का खतरा बना रहा है।
हाल में ही चार दिसंबर 2014 को रानीपुर थाना क्षेत्र के महासो रेलवे क्रासिंग पर स्कूली वैन के ट्रेन की चपेट में आने से नौ बच्चों की मौत हो गई, जब कि चार बच्चे घायल हो गए। इस घटना से पूरा रेल महकमा हिल गया। मौके पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु एवं रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने पहुंचे घटना में घायल एवं मरे बच्चों के परिवार के लोगाें को सांत्वना देकर मुआवजा दिलाया।
यही नहीं 24 घंटे के भीतर रेलवे क्रासिंग पर फाटक लगाकर चालू करने का निर्देश दिया। घटना के कुछ ही घंटों बाद वहां जंजीर लगाकर ट्रेनों के आने जाने के दौरान सड़क के दोनों पार लोगों को रोक दिया जाता रहा।
फाटक का निर्माण तो जैसे तैसे हो गया, गेटमैन की नियुक्ति कर उसके रहने के लिए एक भवन का भी निर्माण करा दिया गया। लेकिन आज भी फाटक तकनीकी कारणों से नहीं चालू हो पाया। गेटमैन ट्रेन आने के बाद सड़क के दोनों तरफ झंडी लगाकर वाहनों को रोकता है।
रेलवे फाटक पर सभी कार्य हो जाने के बावजूद तकनीकी कारणों से वह क्यों नहीं चालू हो पाया है कि इसके बारे में स्टेशन अधीक्षक जयप्रकाश कहते हैं कि यह मामला तकनीकी विभाग का है।