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Mau News: अब गेहूं की बिक्री के लिए सत्यापन जरूरी नहीं

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मऊ। शासन प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद गेहूं की खरीद में तेजी नहीं आ पा रही थी। इसको देखते हुए अब बगैर सत्यापन कराए ही किसानों से गेहूं खरीद कराने को कहा गया है। अधिकारियों का दावा है नई व्यवस्था से गेहूं खरीद में तेजी आएगी। किसानों को गेहूं का उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन से गेहूं खरीद योजना शुरू की गई है। इसके लिए 61 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। गेहूं खरीद होने के 58 दिन बाद भी लगभग 21.42 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है। बाजार में समर्थन मूल्य के बराबर ही भाव चल रहा है। ऐसे में आढ़तिए किसानों के घर या खेत में ही खरीद ले रहे हैं। सरकारी एजेंसियां भी किसानों से संपर्क कर गेहूं खरीदने में लगी हैं। गेहूं खरीद की रफ्तार को तेज करने के लिए शासन से नई व्यवस्था शुरू की गई है। नई व्यवस्था के तहत खरीद प्रक्रिया को तेज करने के लिए 100 क्विंटल से अधिक की खरीद पर होने वाले सत्यापन प्रक्रिया को भी अब खत्म कर दिया गया है। अभी तक 100 क्विंटल से अधिक गेहूं को क्रय केंद्रों में बेचने के लिए किसानों को खसरा एवं किसान बही का सत्यापन कराना होता था। जमीन और उत्पादकता के आधार पर सत्यापन होता था। इससे बचने के लिए किसान क्रय केंद्रों की जगह मंडी में गेहूं बेच देते थे। ऐसे में अब 100 क्विंटल से अधिक खरीद पर होने वाले इस सत्यापन प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया। अधिकारियों का मनाना है कि इससे खरीद में तेजी आएगी।
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इस प्रक्रिया के खत्म होने से किसानों को फायदा होगा। सत्यापन प्रक्रिया से कई दफा किसानों को भुगतान भी समय पर नहीं मिल पाता था। अब उनको समय पर भुगतान भी मिल सकेगा। गेहूं खरीद में भी इससे तेजी आएगी।
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वीके सिन्हा, खाद्य विपणन अधिकारी, मऊ
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