मऊ। अब खाता से जमा-निकासी करने पर बैंक अलग से शुल्क वसूलेंगे। बैंक औफ बड़ौदा ने नियम लागू भी कर दिया है। नए फरमान से कारोबारियों तथा व्यापारियों में आक्रोश पनपने लगा है। तुगलकी फरमान को वापस लेने के लिए उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री ने वित्त मंत्री को पत्र भेेजा है।
मौजूदा समय में कई ऐसी बैंकिंग सुविधाएं हैं, जिनका इस्तेमाल तकरीबन हर ग्राहक करता है। इसके लिए ग्राहकों से पैसे वसूले जाते हैं। लेकिन अब से खाताधारकों को बैंकों में अपना पैसा जमा करने और निकासी के लिए भी शुल्क देना पड़ेगा। नए नियम के अनुसार बैंक आफ बड़ौदा में खाता में प्रतिदिन एक लाख रुपया निशुल्क जमा किया जा सकेगा। जबकि इससे ज्यादा होने पर प्रति एक हजार पर एक रुपया शुल्क लगेगा। न्यूनतम शुल्क 50 रुपये और अधिकतम 20 हजार रुपया होगा। सीसी, ओवर ड्राफ्ट तथा करेंट एकाउंट से प्रत्येक माह शाखा से तीन बार तक आहरण नि:शुल्क रहेगा। जबकि चौथे बार प्रत्येक आहरण पर 150 रुपये शुल्क लगेगा। बचत खाता में शाखा में तीन बार तक पैसे जमा करना नि:शुल्क रहेगा। चौथे बार प्रत्येक जमा पर 40 रुपये शुल्क लगेगा। साथ ही बचत खाता में शाखा से आहरण करने पर तीन बार तक आहरण नि:शुल्क होगा। चौथे बार में प्रत्येक आहरण पर 100 रुपये शुल्क लगेगा। कारोबारियों के अनुसार कारोबार में लाभांश घटता जा रहा है। नए आदेश से कारोबार पर विपरीत असर पड़ रहा है।
इस संबंध में दवा व्यवसायी नरेंद्र बरनवाल का कहना है कि बैंक आफ बड़ौदा में जमा-निकासी पर अतिरिक्त चार्ज वसूलने का नियम लागू होने से कारोबार पर विपरीत असर पड़ रहा है। नए नियम को वापस लिया जाए। वहीं उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री गोपाल कृष्ण बरनवाल का कहना था कि बैंक में रोज नए-नए आदेश से व्यापारियों, कारोबारियों का लाभांश घटता जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री वर्चुअल मीटिंग में मामला उठा था। उन्होंने बैंक में अलग से चार्ज वसूलने को वापस लेने का आश्वासन दिया था। एक बार फिर वित्त मंत्री को पत्र भेजकर नए नियम को वापस लेने की मांग की गई है।