टक्कर इतनी जोरदार थी कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समीर दत्ता सड़क से करीब 25 फुट नीचे जा गिरे।
वैसे तो जनपद में चाइल्ड मिसिंग केयर यूनिट सक्रिय तो है, लेकिन बच्चों की तलाश में इस यूनिट की कोई महती भूमिका देखने को नहीं मिली। लापता होने के बाद लौटने वाले बच्चों में अधिकांश स्वत: वापस आए या फिर परिवारीजन की तरफ से किया जाने वाला प्रयास उन्हें वापस लाने में सफल रहा।
लेकिन पुलिस इसे अपना योगदान मानकर अभिलेखों में दर्ज कर लेती है। पुलिस की कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि वर्ष 2009 में नगर क्षेत्र के खीरीबाग से गायब हुए बालक नोमान का आज तक पता नहीं चला।
जिले में संचालित मिसिंग चाइल्ड केयर यूनिट जिला मुख्यालय स्थित (डीसीआरबी) जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो में संचालित है। इसी प्रकोष्ठ में एक सेल के रूप में इस केयर यूनिट को संचालित किया जाता है। यहां जिले के हर थानों में दर्ज होने वाली मिसिंग की रिपोर्ट आती है। जिसका रिकार्ड यहां बनाए गए रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसके बाद एक प्रोफार्मा में फोटो लगाकर तलाश गस्ती निकाली जाती है। जो अपने जिले के अलावा गैर जिले को वया वायरलेस के भेजी जाती है।
इसके अलावा तलाश के लिए दूरदर्शन और आकाशवाणी का भी विभाग सहारा लेता है। इसके बाद यह सूचना (एससीआरबी) प्रांतीय अपराध अभिलेख ब्यूरो को भेजी जाती है। वहां से (एनसीआरबी) राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो को यह प्रक्रिया है लापता के तलाश की।
लेकिन जिले में हुई गुमशुदगी पर एक नगर डाले तो इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक सात बच्चे लापता हुए। लापता हुए बच्चों में 8 से अंडर 18 है। इसमें से पांच खुद से वापस लौट आए। लापता हुए बच्चों में तीन किशोरियां थी। हालांकि पुलिस विभाग इस उपलब्धि को अपने गुड वर्क में जोड़ रहा है। इस यूनिट के पास बीते वर्ष हुई गुमशुदगी का कोई रिकार्ड नहीं था। पूछने पर डीसीआरबी प्रभारी निरीक्षक अरूण राय ने बताया कि 15 के करीब दर्ज हुआ था। लेकिन कितने वापस लौटे यह बता पाना मुश्किल है।