शीतलहरी और गलन से परेशान जनजीवन को रविवार को भी किसी प्रकार की राहत नहीं मिली। दिनभर सूरज के दर्शन नहीं हुए ।
यह हाल पिछले एक हफ्ते से है। पिछले सोमवार से न्यूनतम तापमान सात से आठ डिग्री के बीच बना हुआ है, अधिकतम तापमान में भी विशेष फर्क नहीं रहा, 17 से 22 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
21 जनवरी तक आठवीं तक के स्कूल बंद रहेंगे। अलावा और गर्म कपड़ों से भी गलन रोके नहीं रुक रही। हाल यह है कि रविवार को भी सड़कों पर अमूमन सन्नाटा पसरा रहा।
यही हाल रेलवे स्टेशन और रोडवेज के अलावा प्राइवेट स्टैंडों पर भी रहा। गलन से लोगों को गर्म कपड़े पहनने के बावजूद निजात नहीं मिल रही है।
ठंड का दबाव मकर संक्राति के बाद भी कम नहीं हो रहा है। गलन में किसी दिन कुछ कमी भले ही आ जा रही है, लेकिन दूसरे दिन ही वातावरण पहले की ही तरह हो जा रहा है।
पिछले तीन दिनों से मौसम ने ऐसी पलटी मारी है कि ठंड कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। पिछले तीन दिन की बात करें तो गुरुवार को सूर्य के दर्शन तक नहीं हुए,
यही नहीं शुक्रवार को भी दोपहर एक बजे तक मौसम में बादल छाए रहे और कोहरे का भी असर दिखा। इसके चलते लोग सुबह से ही ठिठुरते नजर आए। सुबह से ही लोग जगह-जगह अलाव की व्यवस्था में जुट गए। ठंड का असर बाजारों में भी साफ दिख रहा है।
सार्वजनिक स्थानों रेलवे स्टेशन और बस स्टेशनों पर यात्री गाड़ियों के इंतजार में रात से लेकर सुबह तक ठिठुरते नजर आए। इन स्थानों पर अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं है।
इसके चलते यात्रियों का बुरा हाल है। वह अपने साथ कंबल और रजाई तक लेकर चलने को विवश हैं। गरीब तबके के परिवार जिनके पास ढंग के पर्याप्त गर्म कपड़े नहीं हैं,
उन्हें भी बस आग का ही सहारा बना हुआ है। वह भी अलाव के समीप बैठकर अपने परिवार के साथ किसी प्रकार ठंड के जाने की ही दुआ कर रहे हैं।