मऊ/बढुआ गोदाम। सरकारी दावों के बावजूद मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं में धन की बंदरबांट बेरोकटोक जारी है। गांवों में मनरेगा के तहत किए जा रहे कार्यों में अयिमितताओं की झड़ी लगी है। जिले के आठ ब्लाकों के 151 गांवों में कराए गए कार्यों की सोशल आडिट में पाई जाने वाली लगभग चार करोड़ की वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट शासन तक चली गई है। प्रमुख सचिव के आदेश के बाद भी आरोपियों से रिकवरी कराने के प्रति जिम्मेदार अफसर उदासीन हैं। यही वजह है कि आदेश के डेढ़ साल बाद भी आरोपियों से वसूली नहीं हो पाई है। समीक्षा के नाम पर अधिकारी इसे लटकाए हुए हैं।
मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2019-20 में हुए विकास कार्यों की सोशल आडिट में 8 ब्लाकों में 603 गांव में 1239 शिकायती प्रार्थना पत्रों पर कराई गई जांच में वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थी। कुल 604 कार्यों में 3 करोड़ 98 लाख 7,119 रुपए की अनियमितता पाई थी। इसकी रिपोर्ट शासन को चली गई थी। प्रमुख सचिव ने इस धनराशि की वसूली का निर्देश दिया था। तत्कालीन ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और मनरेगा तकनीकी सहायकों से रिकवरी कराने का आदेश दिया गया था।
धनराशि की वसूली के लिए जिला विकास अधिकारी और प्रभारी डीसी मनरेगा विजयशंकर राय ने सभी खंड विकास अधिकारी को पत्र भेजकर वसूली करने का निर्देश दिया था। इस मामले वसूली करने में लापरवाही बरतने पर शासन की तरफ से पत्र जारी कर तत्काल वसूली के आदेश जारी किया गया हैं।
जिला विकास अधिकारी और प्रभारी डीसी मनरेगा विजयशंकर राय ने बताया कि 8 ब्लाक के 603 गांवों में हुई 604 कार्यों में 151 गांवों में अनियमितता मिली थी इसकी रिपोर्ट जिला अधिकारी और शासन को दी गई थी। कोरोना संक्रमण काल होने के कारण वसूली के काम भी प्रभावित हुआ है।