भरत मिलाप और मुहर्रम एक साथ पड़ने के कारण दुर्गापूजा महासमिति एवं जिला मुहर्रम ताजिएदार समिति ने एक साथ बैठक की। 21 अक्तूबर को नवमी और मुहर्रम के सातवें जुलूस के लिए 12 बिंदुओं पर समझौता किया। इसके तहत संस्कृत पाठशाला पर पंडाल का आकार छोटा किया जाएगा। अलम का जुलूस निकलने के दौरान संस्कृत पाठशाला के पास किसी प्रकार का मातम नहीं होगा।
दोनों समितियों ने शुक्रवार को संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता कर जानकारी दी। प्रेसवार्ता के दौरान जिला मुहर्रम ताजिएदार कमेटी के अध्यक्ष मकसूद खां एवं दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष श्यामकरन राय ने संयुक्त रूप से बताया कि दोनों त्योहार एक ही साथ पड़ने के चलते दोनों कमेटियों के बीच कई बार की बातचीत के बाद सौहार्द के लिए रास्ता निकाला गया। बताया कि संस्कृत पाठशाला पर समझौते के तहत दुर्गा पंडाल का पूर्व से काफी छोटा पंडाल बनेगा। जो भवन के सीढ़ी से सटा रहेगा।
जब अलम का जुलूस दुर्गा प्रतिमा के सामने से निकलेगा तो दुर्गा पूजा समिति के सदस्य मूर्ति के तरफ चेहरा करके मानव श्रृंखला बनाएंगे, अलम के जुलूस को शांतिपूर्वक गुजरने देंगे। इस दौरान किसी भी तरफ से लाउडर, नारेबाजी या घंटा घड़ियाल या आरती नहीं होगी।
संस्कृत पाठशाला से आगे मस्जिद तक किसी भी प्रकार का मातम न करने पर भी संयुक्त रूप से सहमति बनी है। राजस्थान भवन के पास पुलिस रस्सा लगाकर भीड़ को रोकेगी और केवल अलम के जुलूस के लोगों को ही संस्कृत पाठशाला की तरफ जाने दिया जाएगा। आर्य समाज मंदिर के पास बल्लीपुरा, अलहदादपुरा व औरंगाबाद में तीन दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित हो रही हैं। यहां यह तय किया गया है कि यहां जुलूस के पहुंचने पर साउंड बंद किया जाएगा।
प्रतिमा के सामने दुर्गा पूजा समिति के सदस्य मानव श्रृंखला बनाकर जुलूस को पास कराएंगे। यहां भी न तो मातम होगा और न ही कोई घंटा आरती का कार्यक्रम होगा। कुल 12 बिंदुओं पर दोनों पक्षों द्वारा संयुक्त रूप से समझौता किया गया। बताया कि ऐसा समझौता पहली बार हुआ है।
पूर्व में वर्ष 1983 एवं वर्ष 1984 में भी प्रयास किया गया था लेकिन इस प्रकार की सहमति नहीं बन पाई थी। दोनों पक्षों ने समझौते की प्रति जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दी है। इसमें इरफान अली, रसूल हसन, छऔोटेलाल गांधी, विनय कुमार, मयंक मद्देशिया आदि रहे।