जिला मुख्यालय पर खड़ी बड़ी इमारतों में से अधिकांश के पास आग से निबटने की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में मानक को ताक पर रखकर तैयार इन भवनों के 75 स्वामियों को फायर विभाग ने नोटिस जारी किया है। इसमें नवनिर्मित महिला अस्पाल भवन के साथ-साथ कई प्रतिष्ठित विद्यालय, सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल शामिल है। हालांकि संपर्क करने पर मास्टर प्लान के प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि शासन से जारी गाइड लाइन को पूरा करने वाले नक्शे को ही पास किया जाता है।
विनियमित क्षेत्र की नियमावली में वर्ष 2005 में संशोधन कर नई शर्त जोड़ी गई। इसके तहत वर्ष 2005 से पास होने वाले नक्शे में फायर विभाग से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होना आवश्यक है। लेकिन वर्ष 2005 के बाद जिले में बनाए गए भवनों में इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। ऐसे में मुख्यालय से लेकर जिले के विभिन्न हिस्सों में खड़ी अधिकांश इमारतों में इस आदेश की अनदेखी की गई है। नवागत चीफ फायर अधिकारी सुभाष कुमार ने जांच के दौरान इस गड़बड़ी को पकड़ा। परिणामस्वरुप उन्होंने जांच कराने के बाद बीते माह जिले के 75 भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी किया।
इसमें इंडस्ट्रियल एरिया में मौजूद उद्योग धंधे से संबंधित 22 भवन, नवनिर्मित जिला महिला अस्पताल के साथ 10 सरकारी अस्पतालों और 18 प्राइवेट अस्पताल, छह होटल /मैरज हाल, छह व्यवसायिक भवन (जिसमें बैंक , मार्ट आदि संचालित है) और 13 प्रतिष्ठित विद्यालय भवन शामिल है। बताया कि जारी किए गए नोटिस में एक समय सीमा तय की गई है। इसके बाद विभाग पुन: सर्वे करेगा, यदि फायर की व्यवस्था भवन के अंदर हो गई होगी तो ठीक, वरना एक रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। डीएम के विवेक पर है कि वो इन भवनों पर अर्थ दंड लगाते है, या फिर उन्हे सीज करने का आदेश जारी करेंगे या फिर भवन स्वामियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश देते है। इसके बाद उस भवन में होने वाले हादसे के लिए फायर विभाग जिम्मेदार नहीं होगा।