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Mau News: नाम नया, खेल पुराना... सील होने के बाद नाम बदलकर मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़

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नगर के भीटी में बंद पड़ा द पापुलर हा​स्पिटल।संवाद
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जिले में फर्जी अस्पतालों का संचालन थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल के सील होने के बाद दूसरे नाम से फिर से सक्रिय हो जाना, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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यह स्थिति तब है, जब सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) आवास से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक प्राइम लोकेशन पर संचालित पॉपुलर अस्पताल में महिला मरीज को बंधक बनाने का मामला सामने आने के बाद जांच में वह अस्पताल फर्जी पाया गया।
यह अस्पताल बीते सितंबर माह 2025 में सील हुआ था। यह कोई पहला मामला नहीं है, जब इस तरह का मामला सामने आया है। इससे पहले भीटी के बहादुरगंज मार्ग पर संचालित त्रिमूर्ति अस्पताल सील होने के बाद पुलिस लाइन के पास दूसरे नाम से संचालित होता मिला था।
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चौंकाने वाली बात है कि भीटी स्थित पॉपुलर अस्पताल में महिला मरीज को बंधक बनाने के बाद बीते शनिवार को जांच में अस्पताल बिना पंजीयन के होने पर तुरंत सील करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग की टीम दो दिन बाद सोमवार को पहुंची।
यहां अस्पताल प्रबंधन ने मकान मालिक को सामने कर दिया, जहां मकान मालिक द्वारा अस्पताल के खाली होने की बात कहकर अपना मकान सील न करने की बात कही गई।
विभागीय अधिकारियों का दावा था कि जब टीम अस्पताल सील करने पहुंची तो अस्पताल प्रबंधन फरार हो चुका था। ऐसे में शनिवार को मामला सामने आने के बाद भी सील न करना और दो दिन का इंतजार विभागीय अधिकारियों पर बड़ा सवाल उठाता है। यह अस्पताल पहले बलिया मोड़ एपेक्स के नाम से संचालित हो रहा था।
अमर उजाला द्वारा बीते अगस्त 2025 में एक माह में बिना पंजीयन के संचालित तीन निजी अस्पतालों में महिलाओं की मौत के बाद लगातार सीरीज प्रकाशित करने के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर टीम ने जिले में पहली बार 26 अस्पताल सीज किए थे, जिसमें यह अस्पताल शामिल था।
सील होने के बाद यह अस्पताल अपने पुराने स्थान से हटकर महज 500 मीटर पहले भीटी के पास संचालित हो रहा था। ऐसे ही गर्भपात को लेकर थानीदास स्थित सेवासदन क्लीनिक को भले ही विभाग ने सील कर दिया, लेकिन यहां संचालित आनंद पैथोलॉजी, जो किराए के भवन में संचालित हो रही थी, उसके द्वारा सूचना मिलने पर पहले ही सामान हटा लिया गया।
मकान मालिक द्वारा सामान हटाने के बाद सील न करने की बात कही गई। इसके बाद विभाग ने इसे सील नहीं किया। अब वहीं यह पैथोलॉजी दोबारा संचालित होने लगी है।
अधिकारियों की निष्क्रियता या मिलीभगत
जिले में ऐसे कई मामले हैं, जहां सील किए गए अस्पताल दोबारा नए नामों से सक्रिय हो चुके हैं। इसके बावजूद संबंधित जिम्मेदार अधिकारी इन पर प्रभावी निगरानी रखने में नाकाम साबित हो रहे हैं। यह लापरवाही न केवल मरीजों की जान से खिलवाड़ है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। इसी तरह से प्रिंस अस्पताल, जिसके द्वारा आयुर्वेद विधा में पंजीकरण लेकर एलोपैथ विधा में अस्पताल का संचालन करने पर सील किया गया था, वह अब सिकिटिया जाने वाले मार्ग पर दूसरे नाम से संचालित हो रहा है। इसी तरह सितंबर 2025 में फतेहपुर स्थित मंडाव सीएचसी प्रभारी के नेतृत्व में दो टीमों ने मर्यादपुर स्थित खेत में संचालित एक अस्पताल पर छापेमारी कर उसे सील किया था। टीम ने यहां उस समय नोटिस चस्पा किया था, जिसे अस्पताल संचालक ने फाड़ दिया था। अब यही अस्पताल मर्यादपुर में ही बिना नाम के संचालित हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग के पास इन फर्जी अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए पर्याप्त तंत्र नहीं है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत का खेल चल रहा है? मरीजों को ठगने और उनकी जान को जोखिम में डालने वाले इन फर्जी संचालकों पर कब तक अंकुश लगेगा, यह एक बड़ा सवाल है।
सरकारी अस्पताल में खड़ी रहती है निजी एंबुलेंस
जिला अस्पताल में नियमों को ताक पर रखकर यहां निजी अस्पतालों के दलाल सक्रिय हैं। नियमानुसार सरकारी अस्पताल में निजी एंबुलेंस खड़ी नहीं हो सकती हैं, लेकिन जिला अस्पताल में हर दिन दो निजी एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। जिला अस्पताल में निजी अस्पतालों के दलाल भी सक्रिय हैं। बीते कुछ माह पहले बलिया निवासी एक मरीज को एक निजी अस्पताल से जाने का विरोध करने पर दो दलालों ने उसके साथ अभद्रता की थी। इस संबंध में सरायलखंसी थाने में पीड़ित ने दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद न तो अस्पताल प्रबंधन ने कभी निजी एंबुलेंस को लेकर रोक लगाने की कोशिश की और न ही दलालों पर कार्रवाई का प्रयास किया। संवाद
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जिले में पंजीकृत अस्पताल/नर्सिंग होम
100 बेड के निजी अस्पतालों की संख्या : 20
50 बेड के अस्पतालों की संख्या : 34
मेडिकल क्लीनिकों की संख्या : 29
नर्सिंग होम की संख्या : 11
(जनवरी 2026 में जारी आंकड़ों के अनुसार)
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