कचहरी गेट पर नहीं दिखाई दिए कर्मचारी
वाराणसी कचहरी में शनिवार को बम मिलने की खबर के बाद भी मऊ में पुलिस सुस्त रही। कहीं भी सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम नहीं दिख। दिवानी कचहरी की सुरक्षा भी राम भरोसे है। यहां कभी भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं होते। मुख्य गेट पर भी आने जाने वालों की कोई जांच नहीं होती। सुरक्षा में इसी चूक के चलते पिछले दिनो एक युवक रिवाल्वर के साथ न केवल कचहरी में घुस गया, बल्कि एक वकील पर तान भी दी। इस घटना के एक दो दिन तक तो कचहरी परिसर में एकाध पुलिस के जवान दिखाई दिए लेकिन उसके बाद फिर पुराना रवैये पर आ गई पुलिस।
कचहरी के सुरक्षा केे प्रति जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि शनिवार को वाराणसी कचहरी में बम मिलने की खबर के बाद भी यहां जांच पड़ताल की कोई जहमत नहीं उठाई गई। कचहरी की सुरक्षा के लिए नवंबर 2007 में अवकाश प्राप्त जज आरडी निमेश की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया था। वाराणसी, फैजाबाद तथा लखनऊ के कचहरियों में हुए सीरियल बम धमाकों के बाद कचहरियों की सुरक्षा का पैमाना तय करने के लिए गठित निमेश आयोग ने कहा था कि सीओ स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में कचहरी के सुरक्षा की जिम्मेदारी तय की जाय।
इसमें तीन इंस्पेक्टर, पांच से आठ सबइंस्पेक्टर के अलावा पर्याप्त संख्या में पुलिस तथा पीएसी बल तैनात की जाय। साथ ही सीसी कैमरे भी लगाए जाने का निर्देश था। उच्च न्यायालय ने भी कचहरियों की सुरक्षा के यही मानक तय किए थे। लेकिन उच्च न्यायालय तथा निमेश आयोग के सुरक्षा मानक को कौन कहे गिने चुने सुरक्षाकर्मी भी कचहरी में नहीं दिखते।