जमीअत-ए-ओलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में मदरसा मिफ्ताहुल ओलूम की मस्जिद में ‘ताजीयती जनसभा का आयोजन किया गया।
इसमें स्व. मौलाना महफूजुर्रहमान मिफ्ताही द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस मौके पर जमीअत-ए-ओलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि मुल्क में हिंदू अकसरीयत धर्मनिरपेक्ष विचारधारा की द्योतक है। मुल्क को तो सियासतदारों ने बांटा है।
कहा कि इस्लाम में लोगों के धार्मिक आचरण को दो भागों में बांटा गया है। पहला भाग एकीश्वरवाद अल्लाह से बंदों के संबंध पर आधारित है। दूसरा बंदों का बंदों के संबंध पर आधारित है। मौलाना ने कहा कि अल्लाह की इबादत करने से बंदा अपनी आखेरत को संवारता है,
जबकि यदि उसका आचरण एवं संबंध अल्लाह के दूसरे बंदों के साथ अच्छा एवं दोस्ताना न हुआ तो कयामत के दिन उसे बड़ा घाटा उठाना पड़ेगा। कहा कि मुल्क में सियासत ने दिलों को बांटा है, ऊंची कुर्सियों पर बैठे लोग नफरत फैला रहे हैं। मौलाना ने कहा कि मुट्ठीभर लोग धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं जब कि मुल्क की हिंदू अकसरीयत धर्मनिरपेक्ष विचारधारा की द्योतक है।
देश की बहुत बड़ी संख्या धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं की है, जो देश के सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूती देने के लिये हर प्रकार का जतन करती है। इसलिए उलेमा को आगे बढ़कर धर्मनिरपेक्ष के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें मुल्क को बचाना है तो मुल्क की धर्मनिरपेक्ष छवि को बचाना होगा। इसके लिए हजारों वर्ष पुरानी सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा एवं आपसी प्रेम भावना को नए सिरे से गढ़ने की जरूरत है।
उन्होंने स्व. मौलाना महफूजुर्रहमान मिफ्ताही के सामाजिक सौहार्द एवं मानवीय कृत्यों पर आधारित कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।