परिषदीय विद्यालयों में सफाई की दयनीय स्थिति को सुधारने के विभाग ने पुरस्कार योजना की शुरूआत की ही। जिले के तीन सर्वश्रेष्ठ परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत निर्मल विद्यालय पुरस्कार से नवाजा जाएगा। विभाग की ओर से विद्यालयों के चयन के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की जाएगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक बाहुल्य विद्यालयों को इसमें वरीयता दी जाएगी।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। अधिकांश विद्यालयों में शौचालय उपयोग करने लायक नहीं हैं। साफ-फाई के निर्देश के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय ने नया तरीका निकाला है।
जिले के तीन सर्वश्रेष्ठ उच्च प्राथमिक विद्यालयों को उत्तम स्वच्छता, व्यवहार तथा सुविधाओं के संचालन तथा रखरखाव में भागीदारी का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए निर्मल विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित करने की योजना शुरू की गई है। योजना के तहत अनोखे प्रयोग से अन्य विद्यालयों में साफ-सफाई को लेकर लोग जागरूक होंगे।
वही विद्यालय इस दौड़ में होंगे जिनके पास 100 से अधिक छात्र छात्राओं का नामांकन, ओवरहेड टैंक तथा शौचालय में पाइप लाइन से जलापूर्ति, बालिका टॉयलेट, समूह में हाथ धोने की सुविधा तथा दीवारों पर स्वच्छता के स्लोगन लिखे हों।
तीन निर्मल विद्यालयों के चयन से पहले नवाचार कार्यक्रम के तहत 10 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को चिह्नित किया जाएगा। पुरस्कार के लिए तीन सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के चयन के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा पांच सदस्यीय टीम का गठन किया जाएगा।
टीम एक माह तक विद्यालयों पर जाकर अंक प्रदान करेगी। योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से किया गया तो परिषदीय विद्यालयों में सफाई व्यवस्था बेहतर करने के प्रति शिक्षकों तथा छात्रों में प्रतिस्पर्धा विकसित होगी।
इस बाबत जिला समन्वयक निर्माण अजीत तिवारी का कहना है कि जनपद में तीन सर्वश्रेष्ठ उच्च प्राथमिक विद्यालयों को निर्मल विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार के लिए 10 विद्यालयों को चिह्नित किया गया है। पांच सदस्यीय टीम एक माह तक जायजा लेगी। रिपोर्ट के आधार पर तीन सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों का चयन किया जाएगा।