सूखा राहत चेक वितरण में हुई अनियमितता के विरोध में गुरुवार को मधुबन तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने एसडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन के साथ जमकर नारेबाजी की। साथ ही नायब तहसीलदार को उनके कार्यालय में लगभग दस मिनट तक बंधक बनाए रखा। सूचना मिलने पर एसडीएम सदर मौके पर पहुंचे, साथ ही ताला खुलवाकर नायब तहसीलदार को बाहर निकाले। इस संबंध में अधिवक्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। साथ ही सूखा राहत वितरण में हुई धांधली की जांच कराने की मांग की।
मधुबन तहसील क्षेत्र के किसानों को सूखा राहत देने के लिए शासन से 13 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त हुई थी। लेकिन लेखपालों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का बंदर बांट कर लिया गया। इसका परिणाम रहा कि असली लाभार्थी को मुआवजा नहीं मिला वहीं दलालों की मिलीभगत से अपात्रों को इसका लाभ मिला। शिकायत करने पर उन्हें राशि आने की सांत्वना दी जा रही है। इसी बात को लेकर गुरुवार को अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।
गुस्साए वकीलों ने सबसे पहले नायब तहसीलदार सर्वेश सिंह को उनके चेंबर कम कोर्ट में बंधक बनाया। वकीलों के इस कदम से तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। इस बात की सूचना जानकारी होने पर एसडीएम मधुबन दयाशंकर पाठक मौके पर पहुुंचे। उन्होंने ताला खोलवाकर नायब तहसीलदार को मुक्त कराया। इस दौरान अधिवक्ता तहसीलदार कार्यालय का ताला बंद कर एसडीएम कोर्ट के सामने धरने पर बैठ गए। धरना-प्रदर्शन में अधिवक्ता जगदीश सिंह, पारस , संतोष तिवारी, कैलाश , पूर्व जिलाध्यक्ष जवाहर लाल पांडेय, सत्यराम यादव, संजय यादव ,श्रीप्रकाश सिंह सहित दर्जनों अधिवक्ता मौजूद थे।