मऊ। जिले के निकायों में आबादी के बीच खड़े जर्जर भवन हादसों को न्योता दे रहे हैं। दशकों पुराने इन भवनों की मियाद पूरी हो चुकी है, इसमें अधिकांश खंडहर की शक्ल में बदल चुके हैं। बावजूद उन पर न तो भवन स्वामी का ध्यान है और न ही निकायों के जिम्मेदारों की नजर पड़ती है।
बारिश का मौसम शुरू होने से पहले निकायों को अपने अपने क्षेत्र के जर्जर मकानों को लेकर सर्वे कर उन्हें चिह्नित करना था। लेकिन निकायों ने ऐसा नहीं किया, जबकि बीते माह ही नगर पंचायत मधुबन में एक जर्जर मकान के गिरने से बड़ा हादसा होने से बचा था। बावजूद निकायों के जिम्मेदार ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कोई कवायद करते नहीं दिख रहे है।
नगर पालिका मऊ की बात करें तो नगर क्षेत्र के 42 वार्डो में जर्जर मकानों की संख्या 100 से ज्यादा है। लेकिन इस वर्ष नगर पालिका द्वारा कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते सर्वे कार्य नहीं किए जाने की बात कह रहा है। जबकि बीते वर्ष भी संक्रमण की पहली लहर के चलते सर्वे कार्य नहीं हो सका था। जबकि वर्ष 2018-19 में नगर पालिका द्वारा 18 मुहल्लों में 61 जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। इसमें कतुआपूरा, मुहम्मदपुरा, भीटी, रहजनिया, कासिमपुरा, सहादतपुरा, डोमनपुरा आदि मुहल्लें में बने भवन शामिल थे।
वहीं जिले की दूसरी निकाय मधुबन, चिरैयाकोट, अदरी, कोपागंज, अमिला, घोसी, दोहरीघाट जैसी नगर पंचायतों द्वारा भी जर्जर भवनों को चिह्नित करने का काम नहीं किया गया। जबकि मधुबन नगर पंचायत के वार्ड 13 कुर्थीगाढ़ा में एक जर्जर भवन बीते 31 मई को गिर गया था। इसमें घर की गृहणी माया तथा उसकी पुत्री गुडिया घायल हो गई थी। संयोग था कि इस हादसे में जान माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके अलावा भी नगर पंचायत के वार्ड 12 पांती गली में एक मकान बीते 25 जून की रात गिर गया था। इस मामले में अपर जिलाधिकारी के हरि सिंह का कहना है कि निकायों में जर्जर भवनों को चिंहित करने का निर्देश दिया गया है। अधिशासी अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।