मऊ। डीएम की फटकार के बाद जिला अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक के बंद होने के मामले में अस्पताल प्रबंधन चेता है। वह अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ वेतन काटने की कार्रवाई में जुट गया। ऐसे में हड़कंप की स्थिति बनी रही। वहीं एक साथ मेडिकल अवकाश पर कर्मचारियों का मामला भी अस्पताल में चर्चा का विषय बना रहा।
नॉन कम्युनिकेबल डिसीज (एनसीडी) अर्थात असंचारी रोगों के इलाज के लिए एनसीडी क्लीनिक बीते 30 और 31 दिसंबर को बंद थी। ऐसे में शुगर, बीपी आदि जांच मरीज बाहर से कराने को मजबूर हो रहे थे। पड़ताल में पता चला था कि एनसीडी क्लीनिक में तैनात पांच कर्मचारी एक साथ मेडिकल अवकाश पर है। जबकि एक मात्र चिकित्सक इमरजेंसी ड्यूटी के चलते नहीं बैठ रहे हैं। समस्या के संबंध में अमर उजाला ने एक जनवरी को कर्मचारी मेडिकल पर, एनसीडी बंद शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी ने सीएमएस डॉ. बृजकुमार से जानकारी ली और लापरवाही पर नाराजगी जताई। इसके बाद चेते अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल पर गए कर्मचारियों द्वारा दिए गए अवकाश पत्रों की जांच की, साथ ही एक कर्मचारी जो कि ड्यूटी पर होने के बाद अनुपस्थित था। उसका मानदेय काटने का प्रस्ताव बनाकर सीएमओ को भेज दिया।
सीएमएस डॉ. बृजकुमार ने बताया कि अनुपस्थित कर्मचारी का एक दिन का मानेदय काटने का प्रस्ताव बनाकर नोडल अधिकारी को भेज दिया गया है। उधर सीएमएस द्वारा उठाए इस कड़े कदम को लेकर एनसीडी क्लीनिक के कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बनी रही।
15 दिन से ईसीजी बंद, मरीज हलकान
मऊ। एनसीडी क्लीनिक के तहत अस्पताल परिसर के पहले तल पर संचालित फिजियोथेरपी कक्ष में ईसीजी जांच भी बीते 15 दिनों से बंद हैं। दरअसल ईसीजी की जांच करने वाली महिला स्टॉफ के मातृत्व अवकाश पर हैं, जबकि उसकी जगह किसी को वैकल्पिक कर्मचारी की व्यवस्था न होने से यह जांच बंद हैं।