राजग सरकार की ओर से संशोधित अध्यादेश जारी भूमि अधिग्रहण के मामले को लेकर राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि यूपीए सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून मेें संशोधन कर किसानों के हित को सर्वोपरि रखते हुए एक नया भूमि अधिग्रहण कानून बनाया था। जिसमें विशेष रूप से यह प्रावधान था कि अधिग्रहित होने वाली भूमि के 70 प्रतिशत किसानों की सहमति आवश्यक है।
वर्तमान राजग सरकार ने इसमें संशोधन कर नया अध्यादेश पारित किया है। नए अध्यादेश में किसानों की सहमति के बिना पूंजीपतियों को भी उद्योग व अन्य निर्माण कार्य के लिए भूमि अधिग्रहण करने का रास्ता साफ किया गया है। ऐसे में सरकार पुन: किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर पूंजीपतियों के हाथों बेच सकती है।
यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार ने चावल के निर्यात पर रोक लगा दिया है। 4500 से 5000 रुपये प्रति कुंतल बिकने वाला धान 1800 रुपये से 2000 रुपये प्रति कुंतल में बिक रहा है। नेताओं ने किसानों की जमीन का अधिग्रहण होने से बचाने तथा चावल निर्यात पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश सचिव देवप्रकाश राय, जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, श्रीकांत श्रीवास्तव, शत्रुघ्न सिंह, मनोज कुमार आदि शामिल थे।