कोरोना काल के दौरान आयुष के महत्व को हर घर के लोगों ने जाना था। लोगों को एहसास हुआ था कि सामान्य सर्दी, जुकाम और बुखार के लिए एलोपैथ की बजाय आयुष की दवाओं से भी आराम मिल सकता है।
साल 2020 से लेकर साल 2022 तक आयुष को बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से कई कवायद की गई। तबसे लेकर अभी तक आयुष सिर्फ कागजों में मजबूत हो रहा है, हकीकत में साल 2022 के बाद से आयुर्वेद विभाग में सिर्फ 14 प्रकार की दवाएं आईं थी। 26 सितंबर 2022 को खरीदी गई दवाओं के बाद से कोई खरीदारी नहीं हो सकी है।
बात होमियोपैथ और यूनानी की हो तो साल 2016 से इन दो अनुभाग में कोई दवा नहीं आई है। आयुष ब्लॉक में तैनात तीनों चिकित्सक आने वाले मरीजों को एलोपैथ की दवा लिख रहे है। मरीज के कहने उनको आयुर्वेद, यूनानी और होमियोपैथ की दवा बाहर से लिख रहे है।
आयुष चिकित्सालय में दवाओं की कमी के चलते ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या पहले जहां तीन सौ के पार होती थी, अब यह संख्या सौ भी नहीं पहुंच रही है।
मरीजों को मंगलवार को आयुर्वेद विभाग में शुगर, बीपी, बुखार, यूरिन इंफेक्शन, गठिया, बवासीर, चर्म रोग सहित कई बीमारियों की दवाएं नहीं मिलीं। यूनानी विभाग में भी बवासीर, गुर्दा सहित कई दवाएं फार्मेसी में नहीं मिलने से रोगियों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं।
तीन चिकित्सक और एक फार्मासिस्ट है तैनात
जिला अस्पताल परिसर में बने आयुष ब्लाक में अभी तीन चिकित्सक तैनात है। इसमें यूनानी के लिए डा. एम एम अंसारी, आयुर्वेद के लिए एम पी मौर्य और होमियोपैथ के लिए जी कुमार है। विंदेश्वरी राय फार्मासिस्ट के रूप में कार्यरत है। यूनानी कक्ष में मंगलवार को मात्र पांच मरीज आए थे। आयुर्वेद कक्ष में 40 मरीज और होमियोपैथ कक्ष में 25 मरीज आए थे। तीनाें चिकित्सक ने बताया कि आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल में उपलब्ध दवाओं को लिखा गया है।
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एलोपैथ की तीस प्रकार की दवाएं लिख सकते है आयुष चिकित्सक
आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक (आयुष) चिकित्सक अब 30 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं भी लिख सकते है। आयुष चिकित्सक प्राथमिक उपचार, जैसे बुखार, दर्द, एलर्जी और सामान्य संक्रमण से जुड़ी दवाएं लिख सकते हैं। यह दवाईयां प्राथमिक उपचार में सहायक सिद्ध होंगी। इसके अलावा एलोपैथी की कोई दवा आयुष नहीं लिखेंगे। इसकी पूरी निगरानी सीएमओ करते है।
दवा खरीद के लिए बैठक के दौरान कई बार उच्चाधिकारियों से अवगत कराया गया था। आयुष की सभी दवाइयों की खरीदारी सीएमओ की निगरानी में होती है। -सत्येंद्र साहू, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं युनानी अधिकारी
आयुष विभाग की दवाइयों की खरीदारी के लिए बजट का अभाव है। शासन से अभी तक खरीदारी के लिए कोई निर्देश नहीं है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। बजट आते ही दवाइयों की खरीदारी की जाएगी। -डॉ. संजय गुप्ता, सीएमओ, मऊ