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खुले में मेडिकल वेस्ट फेंका तो होगी जेल

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जिले में अस्पतालों में बायामेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट में लापरवाही को लेकर अब स्वास्थ्य महकमा सख्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जिले में बायामेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट 2016 को संशोधित अधिनियम 2018 को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके तहत अब तक जिले में 9 सरकारी सीएचसी को पंजीकरण किया जा चुका है। साथ ही दूसरे अस्पतालों को पंजीकरण के लिए निर्देश दिया जा रहा है। साथ ही चेताया जा रहा है कि अधिनियम के तहत अगर किसी अस्पताल में खुले में सीरिंज, पट्टी सहित दूसरे मेडिकल वेस्ट खुले में पड़ा मिला तो संबेधित अस्पताल के डाक्टर तथा पैरामेडिकल स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल जेल के साथ 50 हजार का जुर्माना भी लगेगा।
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बायामेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट अधिनियम 2018 बीते साल लागू किया गया। इसे वेस्ट मैनेजमेंट अधिनियम 2016 में बदलाव कर लाया गया। इसके तहत अस्पतालों में खुले में मेडिकल कचरा डंप से रोकने के लिए हॉस्पिटल प्रबंधन कमेटी बनाई गई।

जिसका कार्य बायामेडिकल वेस्ट फेंकने और निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले स्टॉफ को चिह्नित करना होगा। जबकि अस्पतालों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पंजीकरण करना होगा। साथ ही अस्पतालों को बायोमेडिकल वेस्ट के लिए अलग अलग रंग की पॉलीथिन थैलियों का प्रयोग करने के साथ हर थैली पर अलग से बार कोड अंकित करना होगा।
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इसके अलावा अस्पतालों के लैबोरेट्री, लेबर रूम, आपरेशन थियेटर, आपातकालीन कक्ष, स्टोर, ओपीडी सहित अन्य सुविधाएं वाले स्थान पर लाल, पीला, सफेद तथा लीक प्रूफ और नीला मार्किंग कंटेेनर रखवाना है। नियम के तहत उन लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा, जिनके जिम्मे मेडिकल वेस्ट का निस्तारण का कार्य होगा।  जिला अस्पताल तथा महिला जिला अस्पताल और जिले के 9 सीएचसी का नये नियम के तहत पंजीकरण कराया जा चुका है। वहीं जिले के 38 पीएचसी द्वारा इसकी प्रक्रिया की जा रही है।
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