Mau News: नाबालिग लड़कियों ने बताया कि थाने पर दरोगा साहब ने झूठा बयान लिखवाया और मेरे साथ मारपीट भी किया। एडीजे ने अपने आदेश लिखा कि दरोगा द्धारा मारपीट करना अवैध व अनैतिक कृत्य है। जिससे लोगों का पुलिस के प्रति भय व अविश्वास पैदा होता है। ऐसे दरोगा को दंडित किया जाना आवश्यक है।
मऊ में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राजवीर सिंह ने नाबालिग लड़की को भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। साथ ही पीड़िता के बयान 164 सीआरपीसी को गंभीरता से लेते हुए मामले के विवेचक एसआई आनंद सिंह चौहान के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक और डीआईजी आजमगढ़ को आदेश की प्रति भेजा है। कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया।
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पुलिस अधीक्षक को इस बात का ध्यान रखने का निर्देश दिया है कि अवयस्क पीड़िता संख्या एक का उत्पीड़न पुलिस न करें। मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा की तहरीर पर उसकी दो नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर भागने तथा उनके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया।
पुलिस ने मामले की एफआईआर दर्ज कर दोनों पीड़ितों को बरामद किया। मामले में आरोपी
दक्षिण टोला थाना क्षेत्र के सिंहालपुरा अछार गांव निवासी आकाश कुमार पुत्र सूबेदार राम की ओर से जमानत के लिए अर्जी दी गई। अर्जी पर बचाव पर और विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार मिश्रा और रामचंद्र चौहान के तर्कों को सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद विशेष न्यायाधीश ने आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर लिया।
विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा कि पीड़िता संख्या एक ने अपने बयान अंतर्गत धारा 164 सीआरपीसी में कथन किया है कि पापा, मेरे और मेरी बहन के साथ मारपीट करते थे। हमें बेचने के लिए कहते थे। इसी बात से परेशान होकर मैं और मेरी बहन 25 अक्टूबर 2023 को घर से बिना बताए सूरत चले गए।
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वहां एक कंपनी में काम करते थे तथा कमरा लेकर रहते थे। 22 अप्रैल 2024 को पुलिस हम दोनों को वापस लेकर आई।
एडीजे ने आदेश की प्रति एसपी और डीआईजी आजमगढ़ को भेजा कि पीड़िता को पीटने वाले दरोगा आनंद सिंह चौहान के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जाए। कृत कार्यवाही से न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया। तथा एसपी को इस बात का ध्यान रखने का निर्देश दिया कि पुलिस पीडिता संख्या एक का उत्पीड़न न करें।