मऊ। शासन के फरमान पर चलाए गए पौधरोपण अभियान के तहत नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में वन विभाग सहित 22 विभागों की तरफ से 23 लाख पौध लगाए । लेकिन अभी तक इन पौधों की देखभाल करने की ठोस कार्ययोजना नहीं बनने से पौधों के सूख जाने अथवा पशुओं का निवाला बनने की आशंका बढ़ गई है। अक्तूबर माह में शासन की तरफ से थर्ड पार्टी सर्वे कर अपनी रिपोर्ट भेजेगी।
2018-19 में एक लाख 65 हजार 996 पौधों को रोपा गया था। रखरखाव के अभाव में 25 प्रतिशत पौधे सूख गए थे। शासन-प्रशासन की तरफ से जिले को 2019-20 में वन विभाग सहित 22 विभागों को 23 लाख पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया था। नौ अगस्त को जिले में चलाए गए पौधरोपण अभियान के तहत वन विभाग की तरफ से 8 लाख 28 हजार 325 पौधों का रोपण किया गया। जबकि 22 विभागों द्वारा शहर सहित जिले के 684 गांवों में 17 लाख 62 हजार 369 पौधों का रोपण किया गया। जबकि सूत्रों की मानें तो ग्रामीण इलाकों में किसानों, आवास लाभार्थियों सहित अन्य योजनाओं के लाभार्थियों में पौधों का वितरण किया गया, लेकिन सैकड़ों लाभार्थी ऐसे मिले जिनके यहां पौधरोपण करने के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में काफी पौधे नष्ट हो गए। विभागीय अधिकारी विस्तृत विवरण बताने को तैयार नहीं हैं। गांवों मेें लगाए गए पौधों का रखरखाव मनरेगा के तहत किया जाना है। प्रत्येक ग्राम रोजगार सेवकों को जिम्मेदारी प्रदान की गई है। हालत यह है कि पौधरोपण होने के आठ दिन बाद न तो शहरी और ही ग्रामीण इलाकों में अभी तक न ब्रिक गार्ड लगाया जा सका है और न ही रखवाली की जा रही है। रखरखाव नहीं होने से पौधों के छुट्टा पशुओं का निवाला बनने की आशंका बढ़ गई है। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी संजय विश्वाल ने बताया कि 23 लाख पौधरोपण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। शहर में वन विभाग की तरफ से तथा ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत पौधों का रखरखाव किया जाना है। रोजगार सेवकों को जिम्मेदारी दी गई है। अक्तूबर में शासन की तरफ से थर्ड पार्टी द्वारा सर्वे कराया जाएगा।