मऊ। घोसी विधान सभा से विभिन्न पार्टियों से चुनाव लड़कर छह बार विधायक और तीन बार मंत्री रह चुके फागू चौहान ने राज्यपाल तक का सफर तय किया। शनिवार को जैसे ही फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने की घोषणा हुई, समर्थक जश्न मनाते नजर आए। इसके साथ ही शुभचिंतकों की ओर से उन्हे बधाई दी गई।
मूलरुप से आजमगढ़ जिले के शहर कोतवाली क्षेत्र के शेखपुरा गांव निवासी फागू चौहान पुत्र खरपत्तू चौहान ने
वर्ष 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी से अपना राजनैतिक सफर मऊ के घोसी विधान सभा क्षेत्र से शुरु किया। इस दौरान राजनैतिक सफर में किस्मत ने साथ दिया और वे विभिन्न दलों से छह बार विधायक चुने गए। इस दौरान फागू चौहान कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता के साथ मायावती की सरकार में मंत्री रहे। इसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में हार का सामना करने के बाद वे वर्ष 2017 के चुनाव से छह माह पूर्व भाजपा का पुन: दामन थामे, इस दौरान फागू चौहान छठवीं बार विधायक चुने गए। इस बार फागू चौहान मंत्री तो नहीं बने। लेकिन तीन माह पूर्व प्रदेश सरकार ने इन्हे संवैधानिक पद पर आसीन किया। इस दौरान पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष चुने गए।
फागू चौहान के पिता खरपत्तू साधारण किसान रहे। लेकिन बाद में उनके पास व्यवसाय के रुप में ट्रांसफॉर्मर फैक्ट्री और कोल्ड स्टोरेज और कई व्यावसायिक भवन स्थापित हुए। 1985 में घोसी विधान सभा से फागू चौहान पहली बार दलित मजदूर किसान पार्टी से चुनाव लड़े और पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग पार्टी से कई विधान सभा (विधानसभा) चुनाव लड़े और अधिक से अधिक बार जीते। 2017 उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और बसपा प्रत्याशी अब्बास अंसारी को 7,003 मतों के अंतर से हराया। इस दौरान प्रदेश सरकार ने उन्हे संवैधानिक पद सौंपा। इस दौरान वो पिछड़ा वर्ग कल्याण के चेयरमैन चुने गए।