पुरुषों से ज्यादा महिलाएं चपेट में
एआरटी सेंटर के आंकड़े के अनुसार वर्तमान में 2661 मरीजों का उपचार चल रहा है। इसमें सबसे अधिक 1398 महिला मरीज हैं। जबकि 1239 पुरुष और 119 किशोर हैं। मार्च माह 2026 से अब तक 137 नए मरीज आए हैं। इसमें 96 पुरुष, 38 महिला मरीज और 2 किशोर हैं। अगर बीते वर्ष के आंकड़े की बात करें तो यह संख्या 2580 थी।
काउंसिलिंग में सामने आया कि बाहर रहने के दौरान जागरूकता के अभाव के चलते ये युवा इस जानलेवा वायरस की चपेट में आ गए। सेंटर इंचार्ज डॉक्टर मुकुल मौर्या के अनुसार, रोजगार और पढ़ाई के लिए बाहर जाने वाले युवा अक्सर सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण लापरवाही का शिकार हो जाते हैं। फिलहाल इन सभी संक्रमितों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखते हुए उनका इलाज और एआरटी थेरेपी शुरू कर दी गई है।
केस एक
जिले के मधुबन तहसील का एक ग्रामीण क्षेत्र का 24 वर्षीय युवक पिछले दो साल से दिल्ली में एक फैक्टरी में कार्यरत था। तीन महीने पहले जब वह घर लौटा, तो उसे लगातार बुखार और कमजोरी की शिकायत रहने लगी। जांच कराने पर उसकी रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई। काउंसिलिंग में उसने माना कि वहां रहने के दौरान वह अम्रक्षित जीवनशैली की गिरफ्त में आ गया था।
केस दो
उच्च शिक्षा के लिए बाहर गए छात्र की रिपोर्ट पॉजिटिव एक प्रतिष्ठित संस्थान में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए राज्य से बाहर गए 24 वर्षीय छात्र की तबीयत अचानक खराब हो गई। वजन लगातार घटने और बार-बार बीमार पड़ने पर परिजनों ने उसकी चिकित्सा जांच कराई। एआरटी सेंटर की जांच में वह संक्रमित पाया गया। छात्र ने माना कि दोस्तों की गलत संगत और जागरूकता की कमी के कारण उससे यह चूक हुई।
केस तीन
आर्थिक तंगी के कारण एक 26 वर्षीय युवक मुंबई में मजदूरी करने गया था। ढाई महीने पहले वह गांव लौटा और लगातार टाइफाइड व निमोनिया से पीड़ित रहने लगा। जब सामान्य दवाओं से आराम नहीं मिला, तो डॉक्टरों ने एचआईवी टेस्ट की सलाह दी। टेस्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अब उसका एआरटी केंद्र पर उपचार चल रहा है।