मऊ। शहर के सबसे व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग बाल निकेतन पर ओवरब्रिज निर्माण की बाबत रेलवे सहमति दे चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार भी एनओसी दे चुकी है। ओवरब्रिज का निर्माण उत्तर प्रदेश सेतु निगम को करना है। ओवरब्रिज निर्माण की लागत भी स्वीकृत हो चुकी है। रेलवे, उत्तर प्रदेश शासन और सेतु निगम के कर्मचारियों के बीच कई बार वार्ता भी हो चुकी है। हाईकोर्ट के आदेश पर बनने वाले इस ओवरब्रिज निर्माण में नक्शा रोड़ा बना हुआ है। सेतु निगम का कहना है कि रेलवे की ओर से संशोधित नक्शा मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।
बाल निकेतन के पास रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग दशकों पुरानी है। इसको लेकर समाजसेवी और लोकदल नेता देवप्रकाश राय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रेलवे और प्रदेश सरकार की नींद टूटी। हाईकोर्ट के चार मई 2018 के आदेश पर 26 जून 2018 को डीएम और डीआरएम की बैठक हुई। इसके बाद दो जुलाई 2018 को डीएम ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण को पत्र लिखा। रेलवे और प्रदेश शासन के अधिकारियों के निर्देश पर जिला प्रशासन ने ओवरब्रिज निर्माण के लिए पैमाइश कराई। इसमें 296 मकानों को चिह्नित किया गया।
इसके बाद ओवरब्रिज निर्माण के लिए 95 करोड़ की लागत का इस्टीमेट बनाकर भेजा गया, जो स्वीकृत कर दिया गया। लेकिन, इसके बाद रेलवे और प्रदेश शासन दोनों शिथिल हो गए। फिर हाईकोर्ट की फटकार के बाद डेढ़ साल बाद कोराना संकट काल में प्रमुख अभियंता ने आठ अप्रैल 2020 को ओवरब्रिज निर्माण की अधिसूचना जारी कर दी। रेलवे की ओर से ओवरब्रिज का नक्शा सेतु निगम को दिया गया। लेकिन उसमें कुछ गलतियां रह गई थीं। इसे संशोधन के लिए रेलवे को भेजा गया। लेकिन छह महीनों से अधिक समय बीत चुका है। कोई प्रगति नहीं हो रही है।
रेलवे की ओर से संशोधित नक्शा भेजने में क्यों देरी हो रही है, यह लोगों की समझ में नहीं आ रहा है। इस बाबत सेतु निगम के महाप्रबंधक सुनील कुमार का कहना है कि रेलवे को संशोधित नक्शा बनाने के लिए भेजा है। अभी तक नक्शा नहीं मिला है। संशोधित नक्शा मिलते ही ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि रेलवे अभियंता ने आश्वासन दिया कि एक हफ्ते के अंदर संशोधित नक्शा उपलब्ध करा दिया जाएगा। उधर, ओवरब्रिज निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे देव प्रकाश राय कहते हैं कि रेलवे और प्रदेश सरकार यदि इस मामले में ज्यादा हीलाहवाली करेगी तो फिर से हाईकोर्ट का सहारा लेंगे।
फाटक बंद हो जाने से लगता है जाम
ओवर ब्रिज नहीं बनने से ट्रेनों के आने के समय रेलवे फाटक बंद हो जाने पर कुछ ही देर में भारी जाम लग जाता है। इससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ओवरब्रिज बन जाने से लोगों को जाम से राहत मिलेगी। बाल निकेतन पर ओवरबिज निर्माण का विरोध कुछ लोग कर रहे हैैं। ऐसे लोगों का तर्क है कि ओवरब्रिज निर्माण हो जाने पर कई लोगों का व्यापार नष्ट हो जाएगा। ऐसे लोग ओवरब्रिज निर्माण को रोकने के लिए राज्यपाल से मुख्यमंत्री तक से मिलकर प्रार्थना पत्र दे चुके हैं।