उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष हनुमान प्रसाद सिंह ने कहा कि आज देश में कृषि की हालत दयनीय है जो चिंता का विषय है। भारत की 66 प्रतिशत आबादी कृषि पर ही निर्भर है।
बावजूद देश में कृषि कार्य सबसे घाटे का सौदा माना जाता है जब कि इसे सबसे फायदे का होना चाहिए। एक गेहूं के बीज से किसान 40 बीज पैदा करता है बावजूद वह कौन सा कारण है कि जिसके चलते किसान को घाटा उठाना पड़ता है। वे मंगलवार को पीडब्लूडी के डाकबंगला पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहीं।
कहा कि आज भी देश में एक चौथाई खेतों की ही सिंचाई हो पाती है जब कि तीन चौथाई खेत असिंचित रह जाते हैं। इस चुनौती को कृषि अनुसंधान ने भी स्वीकार किया है।
कहा कि कृषि को लाभपद्र बनाने के लिए कम भूमि पर अधिक एवं फायदेमंद खेती के साथ पशुपालन की आवश्यकता है। मशरूम, बकरी पालन, डेयरी, मधुमक्खी पालन, बाग आदि से कृषि क्षेत्र में उन्नत संभव है।
उन्होंने कहा कि देश में खेती की भूमि लगातार घट रही है। बावजूद इसके कम भूमि पर भी व्यवसायिक खेती एवं पशुपालन के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है।
कहा कि फसलों को नीलगायों से बचाए जाने के लिए बीएचयू में रिसर्च चल रहा है। कुछ सकारात्मक सुझाव भी आए हैं। दो वर्ष में शोध पूर्ण हो जाएंगे। उम्मीद जताई कि इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे।
कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते आज तक किसानों की दुर्दशा है। किसानों के हित में उनकी कृषि को लाभपद्र बनाए जाने के लिए कोई रचनात्मक कार्य नहीं किए गए।
कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों की बीमा राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया, भूमि संरक्षण विभाग से भूमि सेना योजना चलाई जा रही है। इसके माध्यम से बंजर, ऊसर आदि भूमि को सुधारा जा रहा है।
किसानों की सिंचाई की व्यवस्था मुफ्त की गई है। इस अवसर पर मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष शिवप्रताप यादव, संजय पांडेय, लालबहादुर यादव, पंकज चौबे, नन्हकू राजभर, कुद्दुस अंसारी, हजारी सिंह आदि उपस्थित रहे।