सरकारी कार्यालयों में आग से बचाव के इंतजाम कागजों तक सीमित हैं। पड़ताल में सरकारी भवनों में कहीं भी ठोस सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। डीएम कार्यालय के सभागार में पहले आग लगने की घटना के बावजूद उसके बाहर अग्निशमन यंत्र नहीं मिला।
वहीं सीडीओ कार्यालय में लगे तीन अग्निशमन यंत्रों में से एक ही काम करने की हालत में मिला। यह स्थिति जिले के सबसे बड़े सरकारी भवनों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
नियम के अनुसार अग्निशमन यंत्रों की जांच हर वर्ष होनी चाहिए, लेकिन विभागीय अधिकारी इस ओर उदासीन हैं। आग की घटना के बाद अग्निशमन विभाग सरकारी कार्यालयों से संपर्क कर यंत्र लगाने की सलाह देता है, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है।
संवाद न्यूज टीम ने शुक्रवार को सरकारी कार्यालयों की पड़ताल की। इस दौरान सरकारी भवनों में भी आग से बचाव को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं मिले।
डीएम कार्यालय के जिस सभागार में पहले आग लग चुकी है, उसके बाहर ही आग से बचाव का कोई यंत्र नहीं मिला। वहीं सीडीओ कार्यालय में आग से बचाव के लिए तीन अग्निशमन यंत्र लगे मिले, जिनमें एक सीडीओ कक्ष के बाहर नया लगा था।
दो में से एक की पाइप पूरी तरह खराब हो चुकी थी और एक पर एक्सपायरी डेट भी अंकित नहीं थी। जिले के ये सबसे बड़े दो सरकारी भवन हैं, जहां कई कार्यालय संचालित होते हैं।
नियमानुसार सरकारी कार्यालयों में अभिलेखों को सुरक्षित रखना विभागों की जिम्मेदारी है, लेकिन अधिकतर दफ्तरों में अग्निशमन के इंतजाम नहीं हैं। जहां इंतजाम किए गए हैं, वहां भी केवल खानापूर्ति हुई है। न तो अग्निशमन यंत्र ठीक हालत में हैं और न ही पानी का समुचित इंतजाम है।
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डीआईओएस, बीएसए कार्यालय में नहीं हैं कोई इंतजाम
मऊ। डीआईओएस कार्यालय और बीएसए कार्यालय भवन में आग से बचाव के लिए अभी तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। यहां तक कि अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगाए गए हैं, जबकि कार्यालयों में जगह-जगह फाइलें रखी हुई हैं। पानी और बालू का भी कोई इंतजाम नहीं है। इसके बावजूद विभाग को कोई चिंता नहीं है। बीएसए संतोष उपाध्याय का कहना है कि कार्यालय में आग से बचाव का इंतजाम होना चाहिए, और इस दिशा में पहल की जाएगी।
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आग से बचाव की व्यवस्था पर डेमो में ही फेल हुआ निजी अस्पताल
मुख्य अग्निशमन अधिकारी के. वर्मा ने बताया कि जिले में इन दिनों शासन के निर्देश पर अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सरकारी और निजी भवनों में आग से बचाव की जांच की जा रही है और मौके पर संसाधनों का डेमो भी कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में ब्रह्मस्थान स्थित एक निजी अस्पताल में सभी आग से बचाव की व्यवस्थाएं थीं, लेकिन जब डेमो कराया गया तो वह फेल हो गया। ऐसे कई मामले सामने आए हैं। भवन स्वामी केवल कार्रवाई से बचने के लिए इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन प्रशिक्षण और विशेष कर्मचारी की व्यवस्था नहीं करते। ऐसे कई भवन स्वामियों को चेतावनी पत्र जारी कर खामियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
विकास भवन में शोपीस बना अग्निशमन यंत्र।संवाद- फोटो : बहराइच में चिलचिलाती धूप में गुजरते लोग।