याजा आम लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। गेहूं उत्पादन पर इसका असर दिखा। जिससे नाम मात्र ही खरीद हो पाई थी। विभागीय कवायद के बाद भी लक्ष्य 35 हजार एमटी के सापेक्ष 5142.77एमटी तक पहुंची। अब हाल यह है कि गेहूं का दाम में तेजी आने लगी है। लोगों के सामने मुश्किलें आने की संभावना प्रबल हो गई है।
मौसम परिवर्तन तथा प्राकृतिक आपदा के चलते गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ा है। गेहूं खरीद की सही तरीके से मानीटरिंग न होने से किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय होती जा रही है। जिले में 95614 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई की गई थी। कृषि विभाग की ओर से 365.626 हजार एमटी उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। फसल अच्छी होने से किसान उत्साहित थे।
लेकिन फरवरी माह से ही तापमान में वृद्धि तथा तेज हवा के चलने से गेहूं की फसल समय पूर्व ही पक गई। ऐसे में उत्पादन में भारी कमी आ गई। विभागीय आंकड़ों में जिले में गेहूं का उत्पादन 1529.82 हजार एमटी दिखाया गया है। गेहूं उत्पादन कम होने से सरकारी खरीद भी लक्ष्य से काफी कम रही। शासन की ओर से गेहूं खरीद का लक्ष्य 35 हजार एमटी निर्धारित किया गया था। शुरुआती समय में अधिकारियों के उदासीन रवैए से बिचौलियों की चांदी कटती रही।
आढ़तियों ने कम कीमत पर ही किसानों से खरीद किया। शासन से दबाव पड़ने पर विभाग की ओर से गेहूं खरीद के लिए घर-घर अभियान चलाया गया लेकिन 5142.77 एमटी खरीद हो पाई। सरकारी रेट 1525 रुपया प्रति कुंतल होने से बड़े किसानों ने गेहूं बेचने में रुचि नहीं लिया। अब बाजार में गेहूं के रेट में भारी वृद्धि होने लगी है।
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गेेहूं के रेट पर नजर डालें तो जून में 1500 रुपया प्रति कुंतल रहा। जबकि जुलाई में 1550 रुपया प्रति कुंतल रहा जबकि अगस्त माह में 1700 रुपया प्रति कुंतल पहुंच गया है। गेहूं के रेट में भारी वृद्धि जारी रहने से आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।