क्रिसमस पर्व को लेकर ईसाई धर्मावलंबियों में उत्साह का माहौल है। पर्व को यादगार बनाने के लिए सुबह से अपने तरीके से योजना बनाने में लगे रहे। आधी रात को प्रभु ईसामसीह के जन्म लेते ही लोग खुशी से झूम उठे। लोगों ने चर्च में प्रार्थना कर जशभन मनाया। साथ ही एक दूसरे को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी।
भगवान यीशु का जन्म होते ही ईसाई समुदाय के लोग पूरी रात जश्न में डूबे रहे। लोगों ने अपने प्रियजनों को आकर्षक उपहार देकर एक दूसरे को बधाई दी। बधाई देने का सिलसिला सुबह तक चलता रहा। मोबाइल नेटवर्क भी व्यस्त रहा। मोबाइल से भी अपने प्रियजनों को एसएमएस भेजकर क्रिसमस की शुभकामनाएं दी। फातिमा स्कूल की प्रधानाचार्य सिस्टर अपोलीन पिंटो ने कहा कि आज से 2010 वर्ष पूर्व बेतलेहेम के गोशाले में प्रभु यीशु का जन्म हुआ था।
तभी से ईसाई धर्मावलंबी प्रभु यीशु के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु का जन्म मानव जाति के उत्थान के लिए हुआ था। क्रिसमस आनंद और खुशी बांटने का त्यौहार है। मानव जाति के प्रति ईश्वरीय प्रेम का एक समारोह है। ऐसे में क्रिसमस पर्व पर हम सभी को प्रभु यीशु के सिद्घांतों को अपनाते हुए दूसरों की मदद करने का संकल्प लेना चाहिए।
इसी क्रम में सविजा पीटर, नंदिनी मसीह, अनिल मसीह ने कहा कि क्रिसमस पर्व हम सभी के लिए खुशियां लेकर आता है। क्रिसमस का दिन विश्व में प्रभु ईसा का शुभ संदेश लेकर आता है। क्रिसमस पर्व पर समाज के बेसहारों, दुखियों, पीड़ितों और निर्धनों के प्रति दिलचस्पी दिखाकर नई मानवता और समाज का निर्माण करने की आवश्यकता है।