मऊ/वालिदपुर। जनपद की नगर पंचायतों और नगर पालिका क्षेत्रों में सड़कों को रोशन करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से लगाई गई स्ट्रीट और तिरंगा लाइटें अब खुद अंधेरे में डूबी नजर आ रही हैं।
कहीं लाइटें खराब पड़ी हैं, कहीं बिजली आपूर्ति बाधित है तो कहीं पोल, तार टूटकर गिर गए हैं। वालिदपुर में दो किमी क्षेत्र में लगी 88 लाइटें बंद हैं।
मऊ शहर के गाजीपुर तिराहे से भीटी तक 68 लाख रुपये की लागत से लगाई गई स्ट्रीट और सजावटी लाइटों की कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बंद है तो कई जगह पोल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। सड़क किनारे लगे खंभों पर अधिकांश लाइटें खराब पड़ी हैं।
रखरखाव के अभाव में ये परियोजनाएं शोपीस बनती जा रही हैं। शाम ढलते ही कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर अंधेरा छा जाता है, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कई स्थानों पर एक ही पोल पर कई लाइटें लगी होने के बावजूद रोशनी नहीं है। कई खंभों से लाइटें और उपकरण भी गायब हैं। सार्वजनिक स्थलों पर लगी हाई मास्क लाइटें भी खराब पड़ी हैं। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से बनी यह परियोजना कागजों तक ही सिमटती नजर आ रही है।
वालिदपुर में दो किमी क्षेत्र में लगी 88 लाइटें बंद
वालिदपुर नगर पंचायत वालिदपुर में स्ट्रीट लाइट योजना को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। वर्ष 2022-23 में करीब 90 लाख रुपये की लागत से घोसी मार्ग से आजमगढ़-मऊ मार्ग होते हुए पट्टी बॉर्डर तक लगभग दो किलोमीटर क्षेत्र में 88 स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। नगर पंचायत के सभासदों मनीष वर्मा, प्रमोद सोनकर, शशि प्रभा और अजमल ने आरोप लगाया है कि तीन वर्ष के भीतर ही अधिकांश लाइटें खराब हो गईं, जबकि कई लाइटें और उपकरण गायब हो चुके हैं। वर्तमान में पूरे मार्ग पर एक भी स्ट्रीट लाइट जलती दिखाई नहीं देती। शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
घोसी, दोहरीघाट व अन्य निकायों में भी स्थिति खराब
अमिला। घोसी नगर पंचायत में धरौली मोड़ से नदवासराय मोड़ तक लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्र में लगी तिरंगा लाइटें शोपीस बनी हुई हैं। देखरेख के अभाव में अधिकांश लाइटें बंद हैं, जिससे क्षेत्र में अंधेरा छाया रहता है। अमिला नगर पंचायत में भी थानीदास मोड़ से अंबेडकर मोड़ तक लगभग ढाई किलोमीटर में लगी तिरंगा लाइटों में दर्जनों लाइटें खराब पड़ी हैं। इसी तरह दोहरीघाट नगर पंचायत में भी स्ट्रीट लाइटों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर खंभे टूटकर सड़क किनारे पड़े हैं।
गारंटी अवधि के भीतर खराब होने पर सवाल
सरकारी योजनाओं के तहत लगाई गई स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी सामान्यतः तीन से पांच वर्ष तक संबंधित एजेंसी की होती है। ऐसे में तय अवधि से पहले ही लाइटों का खराब होना और उपकरणों का गायब होना योजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
वर्जन-
सभी निकायों के ईओ से इस बारे में जानकारी ली जाएगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
-आनंद वर्द्धन, डीएम
नगर के भीटी में गिरा स्ट्रीट लाइट खंभा।संवाद
नगर के भीटी में गिरा स्ट्रीट लाइट खंभा।संवाद