Mau News: भारतीय संस्कृति में रामलीला का अपने एक अलग-अलग महत्व है। कुछ ऐसा ही महत्व है मऊ शहर की श्रीरामलीला का। यहां रामलीला अलग-अलग स्थानों पर मंचन होता है। इसी रामलीला में बीते 35 वर्षों से हनुमान जी का किरदार का मंचन कर रहे हैं बृजेश उपाध्याय।
पेशे से एलआईसी एजेंट और पुरोहित बृजेश उपाध्याय ने बताया कि उनके पिता स्व. राजकुमार उपाध्याय ने 60 वर्षों तक श्रीरामलीला का संचालन किया। जिसमें पुरातन भाषा शैली और संस्कृति से जुड़ी नारदी भी वो गाते थे।
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बृजेश उपाध्याय और उनके बड़े भाई विनोद उपाध्याय ने नारदी के गायन को उनसे सीखा और धीरे-धीरे आज वो स्वयं और उनके भाई इसका गायन करते हैं। रामलीला में नारदी का गायन रामवनगमन, नककटैया, दशहरा रावण वध और भरत मिलाप में होता है।
वहीं बृजेश उपाध्याय ने बताया कि मऊ के ऐतिहासिक भरत मिलाप में वो हनुमान का पात्र का मंचन करते हैं और भरत-हनुमान संवाद सुनकर भरत मिलाप को देखने पहुंचा हर एक व्यक्ति भावविभोर हो जाता है। उन्होंने कहा कि रामलीला हमारी ऐतिहासिक परंपरा का एक हिस्सा है। ऐसे में नई पीढ़ी में पुरातन संस्कृति से जुड़ी नारदी गायन को वो सिखा रहे हैं।