जिला अस्पताल पर पर्ची कटाने के लिए लाइन में लगे मरीज और तीमारदार।
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। डॉक्टर न होने से मरीज लौटने को मजबूर हैं। ऐसे में सीएचसी और पीएचसी से भी रेफर होकर आने वाले मरीजों के लिए भी समस्या खड़ी हो जा रही। डॉक्टरों की कमी के कारण यहां कई रोगों का इलाज नहीं हो पा रहा। खासकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की वजह से यहां आने वाले अधिकांश मरीजों को बीएचयू वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई मरीज सदर अस्पताल पहुंचने से बेहतर वाराणसी या निजी अस्पताल जाना ही ठीक समझते हैं।
डॉक्टरों की कमी की वजह से इन दिनों सदर अस्पताल का हाल खस्ता है। इसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को झेलना पड़ रहा है। सदर अस्पताल में चेस्ट फिजिशियन , हृदय रोग विशेषज्ञ, बर्न के अलावा दूसरे विशेषज्ञ डाक्टरों का अभाव है। इस कारण यहां इन रोगों से पीड़ित मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर रहे। सदर अस्पताल में डाक्टरों के 29 पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां महज 18 डॉक्टरों की ही तैनाती है। इनमें फिजिशियन का एक पद, चेस्ट फिजिशियन का एक पद, रेडियोलाजिस्ट का एक पद , एनेस्थेटिस्ट का एक पद, पैथालाजिस्ट का एक पद, ईएमओ के दो पद, सामान्य चिकित्सक के तीन पद और एक दंत विशेषज्ञ का पद रिक्त है। इसके अलावा अस्पताल में करोड़ों की लागत से बना बर्न यूनिट विशेषज्ञ डाक्टर और स्टॉफ के वजह से शुरू नहीं हो सका है।
अस्पताल के ओपीडी में रोजाना करीब 250-300 मरीज आते हैं। सीएमओ डा. सतीशंचद सिंह का कहना है कि रिक्त पदों के लिए डिमांड पत्र शासन को भेजा जा चुका है। शासन स्तर पर रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया की जाएगी।