घोसी कोतवाली का मझवारा कस्बा मंगलवार को शोक और सदमे में रहा। जिस कमरे में कृष्णा जायसवाल रहता था उसे उसे छोड़कर परिवार दूसरे मकान में मंगलवार को ही जाने वाला था। लेकिन काल के आगे कोशिश नाकाम रही। घटना के बाद शोक में डूबा कस्बा और आसपास की दूकानें पूरी तरह से बंद रही। लोग बचाव कार्य और घायलों की सहायता में लगे रहे।
कृष्णा अपने पूरे परिवार के साथ बरहज से आठ साल पहले यहां आया था। मां-बाप के देहांत के बाद वह मझवारा में छोटा-मोटा व्यवसाय करने की गरज से आया। यहां आकर एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया। मकान के सामने ही काउंटर लगाकर साड़ी बेचने लगा। इस व्यवसाय से किसी तरह उसके परिवार का भरण पोषण होता था। परिवार में पत्नी और चार बच्चे थे। कुछ साल बाद अपने एक समदर्शी भाई को भी उसने अपने पास बुला लिया। जो यहीं पर एक मंदिर में पूजा पाठ करता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कृष्णा जब से इस कमरे में रहना शुरू किया तब से परेशान था। कई बार उसने मकान बदलना चाहा, लेकिन किसी न किसी वजह से बदल नहीं पाया। लोग बताते हैं कि मकान में ग्रह शांति के लिए कई बार पूजा पाठ भी करवाया।
दरअसल कस्बे के कुशहर यादव के मकान के जिस कमरे वह रहता था, उसी के ऊपर वाले कमरे में दस साल पहले एक महिला की ऐसी ही घटना में जलकर मौत हो गई थी। इसे लेकर परिवार में तनाव जैसी स्थित बनी रहती थी।
ऐसे में कृष्णा ने लंबी कोशिश के बाद नया मकान खोज लिया था, मंगलवार को वह इसे बदलना भी चाह रहा था। उसने कस्बे में ही दो कमरे का मकान ले लिया था। लेकिन इससे पहले ही पूरे परिवार की चिता बन गई।
अभी कुछ दिन पहले ही कृष्णा की पत्नी की बहन अंकिता तथा उसके साले की लड़की मुस्कान भी उसके यहां आई हुई थी। इस घटना में ये दोनों भी झुलसे गए, जिनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।