मासूम जहीर जिन गलियों में खेलता था, उसी के चार लोग उसके हत्यारे बन गए। उसके मामा का धनाड्य होना ही मौत की वजह बन गई। जहीर के पिता रियाज के आर्थिक हालात रोज कुंआ खोदने और पानी पीन जैसी है। लेकिन हत्यारों की निगाह उसके मामा की दौलत पर थी। मामा का दुलारा होने के चलते आरोपियों ने उसे निशाना बनाया। मासूम की हत्या अपहरण के चार पंाच घंटे बाद ही कर दी गई थी, क्योंकि मासूम ने चारों आरोपियों का पहचानने के बाद शिकायत की बात कह दी थी।
अपराधियों ने जहीर का अपहरण उसके मामा मु. अली से फिरौती के लिए किया था। यह बात पुलिस की पूछताछ में सामने आई। चारों आरोपी रियाज के मकान से पांच सौ से छह सौ मीटर की दूरी पर रहते हैं। मुहल्ले वालों का कहना है कि चारों कोई काम नहीं करते। कम समय में धन कमाने की लालच में उन्होंने जहीर के अपहरण की योजना बना डाली। सबसे पहले आरोपी आजाद के दिमाग में जहीर का अपहरण कर उसके मामा से धन ऐंठने की साजिश ने जन्म लिया। उसने इसे साजिश को कामयाब बनाने के लिए अपने दोस्तों रियाज और अब्दुल सलाम के साथ एक अन्य साथी को मिला लिया, जिसका पुलिस ने अभी खुलासा नहीं किया है। चारों ने मिलकर 20 जून को मासूम रियाज का अपहरण कर लिया। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि अपहरण के चार घंटे बाद ही हत्यारों ने इसलिए उसकी हत्या कर दी कि उनकी पोल खुलने का भय हो गया।
आरोपियों ने बताया कि यह साजिश कई दिनों से चल रही थी। मु अली के भी औलाद थे लेकिन वे अपने भांजे जहीर को बेपनाह प्यार दुलार करते थे। उसकी हर ख्वाहिश पूरी करने को वे तत्पर रहते थे। मु अली भी उसी मोहल्ले में रहते थे।