उसके बाद ही सावित्री ने मिट्टी के पात्र से जल ग्रहण किया था। इसी मान्यता के तहत नगर के सहादतपुरा, मुंशीपुरा, ब्रह्मस्थान, चांदमारी इमिलिया, निजामुद्दीनपुरा, ब्राह्मणटोला सहित जिले के मधुबन, घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना, दोहरीघाट, चिरैयाकोट सहित विभिन्न ग्रामीण इलाकों में करवाचौथ का पर्व श्रद्धा से मनाया गया।
इस दौरान सुबह से ही महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निराजल व्रत रखा और दिन में करवाचौथ से जुड़ी कहानियां मंदिरों में जाकर सुनीं। इस दौरान सभी घरों में महिलाओं ने अलग-अलग तरह के व्यंजन भी बनाए। शहर क्षेत्र के पावर हाऊस मंदिर, मां शीतला मंदिर, रोडवेज, फातिमा तिराहा स्थित दुर्गा मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में करवाचौथ से संबंधित कथा का भी आयोजन किया गया था।
चांद का दीदार होते ही छतों पर महिलाएं एक साथ दिखाई दीं। इंदारा में स्थानीय बाजार सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में करवाचौथ पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान महिलाओं ने अलग-अलग तरह के व्यंजन भी बनाए। साथ ही विधि विधान से पूजन-अर्चन कर अपने जीवन साथी के साथ चांद का दीदार किया।