लाखों खर्च के बाद भी पानी आते ही नहर टूटने से सौ एकड़ खेत जलमग्न हो गया और सिंचाई विभाग पर सवाल खड़े होने लगे। जिम्मेदार सवालों पर खामी छिपाने में जुटे हैं। जानकारी के अनुसार हर साल पानी छोड़ते ही नहर टूट जाती है और पानी छोड़ने से पहले लाखों के खर्च से मरम्मत होती है।
लाखों का मरम्मत के बाद भी चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल नहर में पानी छोड़ने पर दोहरीघाट ब्लाक के टिकरी-मुरादपुर गांव में नहर टूट गई। नहर टूटने से दोनों तरफ करीब 100 एकड़ खेत जलमग्न हो गया। यह हाल उस समय है जब पानी छोड़ने से पहले ही नहरों की मरम्मत पर लाखों रूपया सिंचाई विभाग ने खर्च किया था।
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उधर सूचना मिलने पर के बाद सिंचाई विभाग ने पानी बंद कराने के साथ अपनी खामियों को छुपाने में जुट गए। बताते चले कि प्रथम पंचवर्षीय योजना में बनी एशिया की दूसरी चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल से 350 किमी से अधिक नहर से जिले के अलावा बलिया जिले में करीब 50 हजार हेक्टयर में सिंचाई होती है।
ऐसे तो सिंचाई विभाग को नहर में पानी 20 मई के बाद छोड़ देना चाहिए, लेकिन काफी दवाब पड़ने पर दो दिन पहले ही पानी छोड़ा गया है। विभागीय सूत्रों की माने तो पानी छोड़ने से पहले मरम्मत के नाम पर लाखों की राशि आई थी, लेकिन महज कुछ जगहों पर ही मरम्मत कर यह राशि का बंदरबाट कर दिया गया।
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उधर पानी जैसे छोड़ा गया, मरम्मत के अभाव में यह नहर दोहरीघाट ब्लाक के टिकरी मुरादपुर के पास टूट गई। इससे 100 एकड़ से अधिक खेत में पानी चला गया। इस मामले में सिंचाई विभाग के एक्सईएन मनोज सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है, नहर टूटने की सूचना पर अवर अभियंता के नेतृत्व में एक टीम इसे ठीक कर रही है।