मऊ। जनपद में नई ग्राम पंचायतों के गठन के बाद नवनिर्वाचित प्रधान और सेक्रेटरियों ने बिना टेंडर प्रकाशन कराए ही मनमाने तरीके से ग्राम निधि खातों से रुपए निकालकर खर्च किए। इस दौरान गांवों में हैंडपंप रिबोर, वाटर सप्लाई, कीटनाशक घोल के छिड़काव, कोविड गाइड लाइन के प्रचार प्रसार, सीमेंटेड बेंच और सोलर लाइट के नाम पर रुपये निकाले गए। कई गांवों में ठेकेदारों ने बिना आर्डर के ही अपने मन से ही गांवों में सीमेंटेड बेंचों को पहुचा दिया था।
पंचायती राज निदेशालय की गाइड लाइन के अनुसार गांव में विकास कार्य टेंडर प्रकाशन के बाद ही कराए जाने चाहिए लेकिन इस नियम की उपेक्षा कर प्रधानों और सचिवों ने मनमाने तरीके से ग्राम निधि खाते से रुपए निकाले। इस मामले में सवाल उठने पर सितंबर महीने में टेंडर प्रकाशन की प्रक्रिया अपनाई गई। बिना टेंडर प्रकाशन के गांवों में कराए गए विकास कार्यों को लेकर जांच समितियों का गठन किया गया। जांच अधिकारियों ने गांवो में जाकर स्थलीय जांच की ।जांच के दौरान जांच अधिकारियों ने पाया कि गांव में अधिकांश कार्य कराए गए हैं लेकिन जो विकास कार्य कराए गए हैं वे टेंडर प्रकाशन से पूर्व ही कराए गए हैं, जो अनियमितता की श्रेणी में आता है।
जनपद के 671 ग्राम पंचायतों में से लगभग 500 से अधिक ग्राम पंचायतों में टेंडर प्रकाशन से पूर्व धन निकाले जाने की शिकायतें आईं। ऐसे ही एक मामले में बड़राव ब्लाक में तैनात एक सेक्रेटरी को बर्खास्त तक किया जा चुका है। इधर इस प्रकरण को11 अक्टूबर को विधान परिषद की वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब समिति के समक्ष उठाया गया। सूत्रों के अनुसार इस पर विचार के उपरांत समिति के सभापति देवेंद्र प्रताप सिंह की ओर से प्रकरण की जांच एसआईटी से कराने के निर्देश दिये गये। अब जब इस प्रकरण की जांच एसआईटी करेगी तो मामले में कई अनियमितताएं उजागर होने की संभावनाएं जताई जा रही है।