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आक्सीजन देने वाले पौधों की बढ़ी मांग

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मऊ। जिले में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के चलते कोविड मरीजों की संख्या बढ़ने से ऑक्सीजन की किल्लत होने लगी है। कोरोना की दुश्वारियों ने ऑक्सीजन की उपलब्धता के प्रति लोगों को अलर्ट कर दिया है। सांसों की सलामती के लिए लोग अपने घरों, बेडरूम में ऑक्सीजन उगलने वाले पौधे लगा रहे हैं। अभी तक इनडोर प्लांट में रंग-बिरंगे फूल वाले पौधे ही लोगों की पसंद हुआ करते थे। अब जरूरत के मुताबिक पौधे भी बदलने लगे हैं।
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कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अस्पताल जाने वाले कोविड मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में कोरोना की बढ़ती दुश्वारियों के प्रति लोग ज्यादा सजग होते नजर आ रहे हैं। नर्सरियों पर इन दिनों ऑक्सीजन उगलने वाले पौधों की डिमांड बढ़ने लगी है। कारोबारियों से पौधों को लगाने और उसे गमले में बचाए रखने के उपाय पूछे जा रहे हैं। पौधे के लिए कितनी देर की धूप, पानी और किस तरह की खाद चाहिए। पौधा पौष्टिक होगा तभी तो ऑक्सीजन उगलेगा। कोरोना काल में ऑक्सीजन उगलने वाले पौधों की 40 प्रतिशत मांग बढ़ गई है। ऑक्सीजन उगलने वाले पौधों के रुप में मनी प्लांट, एरिका प्लांट, ड्रेसिना, प्रेयर, स्पाइडर, पीस लिली, सिफोटिया पाम सहित तमाम पौधे 50 रुपये से 150 रुपये तक बिक रहे हैं। इसके अलावा तुलसी भी ऑक्सीजन उगलती है, लेकिन वह इनडोर प्लांट में नहीं आती है। ऑक्सीजन उगलने वाले पौधों में बरगद, पीपल, नीम के पौधे हैं। लेकिन इन्हें घरों में नहीं लगाया जा सकता है। इसलिए इनके छोटे आकार के पौधों की मांग बढ़ने लगी है। इस संबंध में श्री दुर्गा जी पौधशाला के संचालक सूर्यप्रताप दुुबे का कहना था कि कोरोना काल में ऑक्सीजन किल्लत के मद्देनजर ऑक्सीजन उगलने वाले पौधों की 40 प्रतिशत मांग बढ़ी है।
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