जिले में एचआईवी पाजिटिव महिलाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रहीहै। सरकार की ओर से कई संगठन एड्स से बचाव की जानकारी देने के लिए लगाए गए हैं। करोडों रुपये इस जानलेवा रोग से बचाव के लिए जागरुकता अभियान के माध्यम से प्रचार प्रसार करने में खर्च किए जा रहे हैं फिर भी जनपद में एचआईवी पाजिटिव लोगों के आंकड़ें चौंकाने वाले हैं।
सदर अस्पताल में बना एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थिरेपी) सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों से ज्यादा इस जानलेवा बीमारी की चपेट में महिलाएं हैं। पिछले तीन सालों का आकड़ा देखें तो पीड़ित गर्भवती महिलाओं के ग्राफ में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई हैं। एड्स (एक्वॉयर्ड इम्यूनो डिफिसिएंसी सिंड्रोम) जैसी भयानक बीमारी से पार पाना अभी भी चिकित्सा जगत के लिए चुनौती बना हुआ है। जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर के रिकार्ड के अनुसार मार्च 2014 से अब तक कुल 1325 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 684 पुरुष और 641 महिलाएं हैं।
जिले में एआरटी के खुलने पर 2014-15 में 95 महिलाएं पीड़ित मिली, जिसमें 11 गर्भवती महिलाएं थी। जबकि 2015-16 में 202 महिलाओं में 9 गर्भवती महिलांए थी। 2016-17 में 187 महिलाओं में 12 तो 2017-18 में 297 महिलाओं में 16 गर्भवती महिलाएं इससे पीड़ित मिली। जबकि 2018-19 के तीन माह में 53 महिलाओं में से 5 गर्भवती महिलाएं पीड़ित मिली हैं। यह वे मरीज हैं जो एआरटी सेंटर पर रजिस्ट्रेशन कराकर नियमित काउंसिलिंग और दवा करा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में ऐसे भी मरीज हैं जो कहीं और इलाज करा रहे हैं या फिर हर दिन घुट-घुट कर मर रहे हैं। एआरटी प्रभारी शिवेंद्र बहादुर सिंह के अनुसार पंजीकृत गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी कराया जा चुका हैं, जहां नियमित दवा और जांच के चलते नवजात को एचआईवी के लक्षण से बचा लिया गया है। एचआईवी पॉजिटिव होने से अभी तक एआरटी में पंजीकृत मरीजों में किसी मरीज की मौत नहीं हुई हैं। जांच के बाद मरीजों को दवाएं वितरित करने के साथ नियमित रूप से जांच की जाती हैं।