महिलाओं में एचआईवी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सकारात्मक बात यह है कि जागरूकता के चलते यह संक्रमण फिलहाल आगे बच्चों में देखने को नहीं मिल रहा। जांच के बाद नियमित दवा का सेवन इसका प्रमुख कारण है। दो वर्ष में 54 गर्भवती महिलाओं ने एचआई संक्रमित होने के बाद भी स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया।
इस वर्ष भी अब तक 17 गर्भवती महिलाओं में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनके द्वारा उपचार कराया जा रहा है। वर्तमान में एआरटी सेंटर में 2600 मरीजों में 1260 महिला मरीजों का रिकार्ड दर्ज है। इस इस दौरान करीब साढ़े 19 हजार संदिग्ध लोग अपनी जांच कराने अस्पताल पहुंचे।
जिला अस्पताल के एआरटी सेेंंटर के आंकड़ों पर गौर करें तो हर वर्ष गर्भवती महिला मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है।
इस वर्ष जनवरी से अक्तूबर महीने तक 17 गर्भवती महिलाएं एचआईवी संक्रमित मिली हैं। वहीं बीते वर्ष यह आंकड़ा 29 जबकि 2023 में आंकड़ा 25 था। अगर कुल मरीजों का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2024 में 2395 मरीज मिले थे, जबकि इस वर्ष 26 मरीजों को चिह्नित कर उनका उपचार किया जा रहा है। वर्तमान में कुल मरीजों में सबसे अधिक 1260 महिला तो 1166 पुरूष और 20 किन्नर और शेष किशोर- किशोरियां है।
एचआईवी एड्स काउंसलर शिवेंद्र सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में हर साल एचआईवी का आंकड़ा जागरूकता के चलते बढ़ रहा है। संक्रमित मिलने के बाद काउंसलिंग करने के बाद नियमित दवा का सेवन से वह स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दे रही हैं। सकारात्मक बात है कि जन्म लेने वालों बच्चों में एचआईवी का लक्षण नहीं मिल रहा है।