हेलमेट लगाना लोगों की आदतों में शुमार नहीं
मऊ। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुकता लाने के तमाम प्रयासों के बाद भी हेलमेट लगाना लोगों की आदातों में शुमार नहीं हो रहा है। नतीजा रोज हो रहें हादसों के रुप में सामने है। चार वर्ष के साथ वर्ष 18 के जनवरी माह के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के विभिन्न मार्गो पर सड़क दुर्घटना की 960 घटनाएं हुई। इसमें पांच सौ लोगों की मौतें हुई। साथ ही 509 लोग घायल हुए। जान गंवाने वाले अधिकांश बाइक चालक या फिर सवार थे। किसी ने भी अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट नही लगाया था।
सड़क हादसों के दौरान सिर में लगने वाले गंभीर चोटों के चलते चालक और सवार को ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार के लोगों को मानसिक आर्थिक और शारिरीक कष्ट का शिकार होना पड़ता है। इससे परिवार के लोग गहरे सदमें का शिकार हो रहें है। इसके बाद भी युवा बिना हेलमेट के बाइकों से फर्राटा भरने से बाज नहीं आ रहें। यह हाल तब है जब पुलिस के साथ विभिन्न सामाजिक संगठन लोगों को सड़क सुरक्षा के नियमों से भलिभांति परिचित करा रही है। इसके लिए नवंबर माह में यातायात माह मनाने के दौरान पुलिस की तरफ से पूरे 30 दिनों तक लोगों को जागरुक करने का कार्य किया जाता है। इसके लिए जगह शिविर आदि लगाकर लोगों को सड़क के नियमों की जानकारी भी दी जाती है। स्कूल के छोटे -छोटे छात्र भी लोगों को जागरुक करने के लिए जुलूस आदि निकलते है। नवंबर यातायात माह बीतने पर पुलिस और यातायात विभाग लोगों के जागरुक होने का दावा करता है। लेकिन हकीकत यह है कि जिले के विभिन्न मार्गो पर बिना हेलमेट के बाइक चलाने वालों पर कोई लगाम नहीं है। जबकि यह यह तभी संभव है जब हम खुद की सुरक्षा के लिए हेलमेट का प्रयोग करना शुरू करें।