मऊ। तीन दशक बाद जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा मंगलवार को डॉक्टर्स-डे पर शुरू हो गई। सुविधा शुरू होते ही पहले दिन एक गंभीर महिला मरीज को इसमें भर्ती किया गया। फिलहाल यह सुविधा दो बेड की है, जिसे जल्द ही एक बेड बढ़ाकर तीन करने की योजना है। आईसीयू वार्ड का शुभारंभ आईएमए अध्यक्ष डॉक्टर एससी तिवारी, सचिव डॉक्टर कंचन लता आजाद और सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने किया।
सीएमएस ने बताया कि इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) को लेकर बीते तीन माह से तैयारी की जा रही थी। इसके लिए अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉक्टर अनिल कुमार को पहले ही लखनऊ जबकि डॉक्टर शैलेश कुशवाह और डॉक्टर रमेश यादव को पीजीआई आजमगढ़ में प्रशिक्षण दिया गया था। इसके बाद दो बेड का आईसीयू वार्ड शुरू करने के लिए ऑक्सीजन, वेंटिलेटर सहित तमाम जरूरी सुविधाओं को पूरा करने के बाद यह सुविधा शुरू हो गई। डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि आईसीयू वार्ड शुरू होते ही एक महिला की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे प्राथमिक उपचार के बाद आईसीयू वार्ड में शिफ्ट किया गया।
जिला अस्पताल में बीते तीन दशक से आईसीयू वार्ड बनाने की मांग चल रही थी। कोरोना संक्रमण काल 2020 में शासन स्तर से तीन वेंटिलेटर भी दिया गया, लेकिन टेक्निशियन न होने से यह शोपीस बने थे। इस समस्या को लेकर अमर उजाला द्वारा जिला अस्पताल में पांच साल से वेंटिलेटर का हो रहा है तबादला शीर्षक से समाचार भी प्रकाशित किया गया था।
एक हजार की ओपीडी, हर दिन तीन से चार मरीज होते हैं रेफर
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब एक हजार मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। आज तक सरकारी अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से तीन से चार मरीज गंभीर हालात में रेफर होते थे। सीएमएस ने बताया कि आईसीयू की सुविधा से अब हार्ट अटैक, सांस उखड़ने, सड़क दुर्घटना में घायल या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उपचार के लिए बीएचयू या फिर निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
तीन डॉक्टरों के साथ चार स्टाफ की हुई है तैनाती
सीएमएस धनंजय कुमार ने बताया है कि आईसीयू के संचालन को लेकर तीन डॉक्टर के साथ चार स्टाफ और दो लैब टेक्निशियन प्रशिक्षण लेकर आए हैं। बताया कि इसके अलावा जल्द ही जिला अस्पताल में ही क्रिटिकल केयर यूनिट का कार्य भी जल्द पूरा होने वाला है। इसके बाद इसकी सुविधा मिलने से स्वास्थ्य सुविधा बेहतर होगी।