अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने दहेज हत्या के मामले में आरोपी पति, सास, जेठ व जेठानी को दोषी पाते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास की सजा के साथ ही कुल 17-17 हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। मामला थाना सरायलखंसी क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार गाजीपुर जिले के नंदगंज थाना क्षेत्र के मदनही गांव निवासी नागेश्वर गुप्ता पुत्र मुनेश्वर की तहरीर पर महिला आयोग के आदेश के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें बढुआगोदाम निवासी पति उमेश गुप्ता व जेठ लक्ष्मी गुप्ता पुत्रगण जंगबहादर, जेठानी मीना गुप्ता पत्नी लक्ष्मी गुप्ता व सास सुशीला पत्नी जंगबहादुर को आरोपी बनाया। वादी का कथन था कि उसकी लड़की प्रतिमा की शादी वर्ष 2005 में उमेश गुप्ता के साथ हुई थी। आरोपी दहेज के लिए उसकी लड़की को प्रताड़ित करते रहे। इसी को लेकर 22 मार्च 2008 को आरोपियों ने उसकी लड़की प्रतिमा को मार डाला।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी श्रीप्रकाश यादव व अधिवक्ता फतेह बहादुर सिंह ने वादी सहित कुल सात गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद उमेश गुप्ता, लक्ष्मी गुप्ता, मीना गुप्ता व सुशीला को दहेज हत्या व प्रताड़ना का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद सभी को दहेज हत्या में सात वर्ष का सश्रम कारावास की सजा, प्रताड़ना में दो-दो वर्ष की सजा के साथ ही दो-दो हजार रुपया अर्थदंड तथा दहेज अधिनियम में पांच-पांच वर्ष की सजा के साथ ही 15-15 हजार रुपया अर्थदंड की सजा का निर्णय सुनाया। अर्थदंड न देने पर क्रमश: तीन माह व दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।