ऐसन दिन केहू न देख साहब लोगन
अपनी पत्नी को खो चुके गुलाबचंद्र ने बताया कि उनकी चार संतान है, लेकिन वह इस बुढ़ापे में हमसे अलग रहते हैं। वह ही मजदूरी करके अपना और अपनी पत्नी का भरण पोषण करते हुए बीमार पत्नी का उपचार करा रहा था। चिकित्सकों से इलाज कराने के दौरान उसे एक ने झाड़ फृूक से बीमार पत्नी के ठीक होने के बात सुनकर वह एक आस में नगरा पहुंचा था। लेकिन किस्मत ने उसके साथ धोखा दे दिया।