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Mau News: हत्या के मामले में पति और सास को आजीवन कारावास

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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक दीप नारायण तिवारी ने दहेज के लिए विवाहिता संजू यादव की लगभग नौ वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में पति और सास को सुनवाई के बाद दोषी पाया।
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दोनों को आजीवन कारावास की सजा के साथ कुल 31-31 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड न देने पर 3-3 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अर्थदंड जमा हो जाने पर 50 हजार रुपये मृतका संजू यादव के भाई बबलू यादव को देने का आदेश दिया गया।
मामला चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, गाजीपुर के सादियाबाद थाना क्षेत्र के नेवादा दुर्ग विजय राय गांव निवासी बबलू यादव पुत्र रामवृक्ष यादव की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई।
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वादी का कथन था कि उसकी बहन संजू यादव का विवाह वर्ष 2017 में चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के जसड़ा खिलवा गांव निवासी राजेश उर्फ अक्षत राज यादव पुत्र पब्बर यादव के साथ हुई थी।
आरोप था कि आरोपी दहेज में 2 लाख रुपये और बुलेट के लिए संजू यादव को प्रताड़ित करते थे तथा 17 जुलाई 2017 को उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर पति राजेश उर्फ अक्षत राज यादव और सास लीलावती देवी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी राजेश पांडेय ने कुल 7 गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। लीलावती देवी व संजू के बीच मारपीट हुई थी, इसी दौरान उसका पल्लू खिंच जाने से उसकी मौत हो गई।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी पति राजेश उर्फ अक्षत राज यादव व सास लीलावती देवी को हत्या, दहेज हत्या, प्रताड़ना और दहेज मांग के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद दोनों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास के साथ 10-10 हजार रुपये अर्थदंड, प्रताड़ना के मामले में 3-3 वर्ष की सजा व 1-1 हजार रुपये अर्थदंड, दहेज लेने के मामले में 5 वर्ष की सजा व 15-15 हजार रुपये अर्थदंड तथा दहेज मांग के मामले में 1-1 वर्ष की सजा व 1-1 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।
अर्थदंड न देने पर 3-3 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अर्थदंड जमा होने पर 50 हजार रुपये वादी मुकदमा बबलू यादव को देने का आदेश दिया गया।

केवल रिश्तेदार साक्षियों को ही प्रस्तुत करने का तर्क किया खारिज
बचाव पक्ष ने कहा था कि केवल रिश्तेदार साक्षियों को ही प्रस्तुत किया गया है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जब कोई घटना किसी व्यक्ति के मकान परिसर में होती है, तो बाहर का कोई तीसरा व्यक्ति साक्षी बनने के लिए कभी तैयार नहीं होता। घटना अभियुक्तों के घर की चहारदीवारी के अंदर हुई थी। ऐसी जगह पर आम आदमी या गांव के किसी स्वतंत्र व्यक्ति की पहुंच होना लगभग असंभव है। इस प्रकार, परीक्षित साक्षीगण घटना के प्राकृतिक साक्षी हैं। कोर्ट ने उनके साक्ष्यों पर अविश्वास करने का कोई आधार नहीं पाया। बचाव पक्ष का तर्क अस्वीकार कर दिया गया।
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