सांसद निधि हो या विधायक निधि इस मद से जारी होने वाले धन पर शासन ने निगरानी शुरू कर दी है। माननीय की निधि में अब उनके प्रतिनिधियों की दाल नहीं गलेगी। यही नहीं विकास के नाम पर किसी मद के लिए निधि जारी करने के लिए स्वयं माननीय के लेटर पैड की स्कैन एवं फोटो कापी मान्य नहीं होगी। लेटर पैड की वास्तविकता एवं माननीय के हस्ताक्षर की जांच होगी। इसके बाद ही निधि जारी की जाएगी।
सांसद एवं विधायकों की प्रतिवर्ष की करोड़ों की निधि विकास कार्यों में खर्च की जाती है। इसमें विधायक और सांसद अपने प्रतिनिधियों को भी अधिकृत कर संबंधित विभागों का प्रतिनिधि नियुक्त कर देते थे। अधिकांशत: प्रतिनिधि ही माननीय के लेटर पैड का इस्तेमाल कर निधि को अपने ढंग से जारी करा लेते थे। इसमें उनके लेटर पैड की फोटो कापी, स्कैन कापी भी प्रयोग में लाई जाती थी।
सांसद और विधायक निधि के दुरुपयोग को रोकने को लेकर शासन ने अब लेटर पैड एवं हस्ताक्षर की जांच किए बिना निधि नहीं जारी करने का निर्देश दिया है। यही नहीं निधि जारी होने के लिए सांसद और विधायकों का वास्तविक लेटर पैड ही प्रचलन में लाए जाने का निर्देश दिया है।
इस संबंध में परियोजना निदेशक हरिचरन सिंह का कहना है कि शासन से माननियों के निधि जारी का गाइड लाइन प्राप्त हुआ है। किसी भी प्रतिनिधि के लेटर पैड पर निधि नहीं जारी होगी और न ही लेटर पैड की स्कैन कापी और फोटो कापी ही मान्य होगी। इसके लिए सभी सांसद और विधायकों को भी अवगत कराया जा रहा है।