राखी गढ़ी गांव में मिले हड़प्पा संस्कृति के निशान
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नए शासनादेश ने ग्राम प्रधानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। ग्राम प्रधानों को इस बार पांच साल के पूरे कार्यकाल की कार्ययोजना पहले ही देनी है। इनमें से एक साल की महत्वपूर्ण कार्ययोजना को प्राथमिकता के आधार पर देनी है।
14वें राज्य वित्त के अंतर्गत इस नई व्यवस्था से विकास कार्य कराने हैं। लेकिन अब तक ग्राम प्रधानों की कार्ययोजना ब्लाकों तक भी नहीं पहुंची है। सरकार की नई पहल गांव में विकास के नाम पर भेजे जा रहे धन के बंदरबांट पर रोक लगाने के लिए है।
गांवों में विकास कार्यों के लिए आने वाली भारी भरकम धनराशि ग्राम प्रधान पद को काफी आकर्षक बना दिया है। अब लोग विकास और सेवा भाव से नहीं अपितु व्यावसायिक दृष्टिकोण से ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें लाखों का वारान्यारा हो रहा हैं।
शाम दंड भेद की नीति अलग से अपनाई जाती है। इधर सरकार ने भी विकास कार्यों के लिए दिए जाने वाली रकम का दुरुपयोग रोकने के लिए कारगर कदम उठाए हैं। जिले में कुल 684 प्रधानों द्वारा अभी कार्ययोजना दी ही नहीं गई है। कुछ प्रधानों ने कार्ययोजना ब्लाक के एडीओ पंचायत को दी है। लेकिन न देने वाले ज्यादा हंै। इसलिए गांवों में इस मद से कोई विकास कार्य शुरू ही नहीं किया जा सका है।