जिले में हार्ट के मरीजों के इलाज के लिए लिए कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। जिला अस्पताल में पांच महीने पूर्व शुरू हुई स्टेमी केयर योजना से हार्ट के मरीजों का उपचार होता है। इसमें अब तक 21 से अधिक मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लखनऊ भेजा जा चुका है।
अब यह कवायद जिले के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी, दोहरीघाट और फतेहपुर मंडाव में भी शुरू की गई है। बुधवार को एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी डॉक्टर बीके यादव ने निरीक्षण किया।
उनहोंने ने बताया कि इस योजना के तहत पहले चरण में जिला अस्पताल को शामिल किया गया था। अब दूसरे चरण में चार सीएचसी के 20 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है।
इसके तहत उन्हें हार्ट के मरीजों को दी जाने वाली प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा, जिसमें ईसीजी, थ्रोम्बोलाइटिस प्रक्रिया शामिल है, इसकी जानकारी दी गई है। साथ ही एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लखनऊ के हृदय रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।
हार्ट से जुड़े मरीजों के आने पर इसकी जानकारी ग्रुप में साझा की जाती है, जिसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर मरीज को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाने की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए चारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक भेजा जा चुका है।
बताया कि बीते दो माह में चार मरीजों का उपचार कर उन्हें लोहिया अस्पताल भेजा गया है, जबकि जिला अस्पताल में यह संख्या 20 से अधिक है।
0000000000
ये है स्टेमी केयर योजना
स्टेमी केयर योजना या नेटवर्क, दिल के गंभीर दौरे के मरीजों को ‘गोल्डन आवर’ (पहले एक घंटे) में त्वरित इलाज प्रदान करने की स्वास्थ्य पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टेली-ईसीजी के माध्यम से हार्ट अटैक की पहचान कर थक्का घोलने वाली दवा देकर मरीजों को विशेषज्ञ केंद्र तक पहुंचाना है।
जिला अस्पताल में रोजाना आते हैं 15 मरीज
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर का एक पद है। वर्ष 2018 में डॉ. पीएन चतुर्वेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद उनका पुनर्नियोजन किया गया था, जो करीब एक वर्ष पहले समाप्त हो गया। तब से यह पद रिक्त है। जिला अस्पताल में हृदय रोग संबंधी मरीज उपचार के लिए आते हैं, तो वे फिजिशियन से परामर्श लेते हैं। आंकड़ों के अनुसार, यहां रोजाना करीब 15 मरीज उपचार के लिए आते हैं। अब योजना के तहत फिजिशियन को प्रशिक्षण देकर बीते डॉक्टर्स डे पर चार दशक बाद आईसीयू की सुविधा शुरू की गई है। वहीं, निजी अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती है, जिनमें से दो अस्पतालों में कैथ लैब की सुविधा भी उपलब्ध है।
इंजेक्शन की बाजार में 33 हजार रुपये कीमत
टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन की सुविधा अब सीएचसी में उपलब्ध होने से जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिली है। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी और गरीब मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा। मरीज के वजन के हिसाब से इंजेक्शन की डोज दी जाती है। हार्ट अटैक के बाद मरीज को अस्पताल लाने पर टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन की 30 एमएल डोज दी जाती है। यदि मरीज का वजन 60 किलोग्राम से अधिक है, तो 40 एमएल की डोज दी जाती है। एक निजी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दीपक राय ने बताया कि हार्ट अटैक के छह घंटे के भीतर यदि मरीज अस्पताल पहुंच जाए और टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन दे दिया जाए, तो खून का थक्का पूरी तरह घुल सकता है, जिससे मरीज की जान बचाई जा सकती है। हार्ट अटैक के लक्षणों में सीने में जकड़न, तेज दर्द, बेचैनी, अचानक सांस तेज चलना, चक्कर के साथ पसीना आना और नब्ज कमजोर पड़ना शामिल हैं।