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आस्थावानों को पूर्णिमा पर गुरु का आशीर्वाद

Tue, 19 Jul 2016 11:59 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
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गुरु पू‌िण्‍ाणिऱ्र्णिमा
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विभिन्न इलाकों में गुरु पूर्णिमा पूरी आस्था और समर्पण के साथ लोगों ने मनाया। गुरु पूर्णिमा पर विभिन्न जिलों से भक्त करजौली स्थित मध्यदेशीय वैश्य अनाथाश्रम तथा बाबा सरजू दास धाम पर पहुंचे। वहीं, सरसेना के लेधिया मोड़ स्थित सत्यदेव गुरु देव बाबा के मठ पर हजारों भक्तों का जमावड़ा रहा। इस अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
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गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्व रामअवध उपाध्याय संगीत महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाया गया। गौरव तिवारी ने गुरु बिन कैसे  गुन गावें प्रस्तुत किया। इसके बाद अदविका ने राग काकी में वन में चरावत श्याम गैया पेश किया। पतंजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान की ओर से गुरू पू्िर्णमा पर्व मनाया गया। इस अवसर पर  जिला प्रभारी दिनेश नंदन राय ने कहा कि गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।  स्वामी दयानंद, स्वामी विवेकानंद जैसे गुरुओं ने हमें अंधकार से प्रकाश की तरफ जाने वाला मार्ग दिखाया। इसी क्रम में भारत स्वाभिमान के संगठन मंत्री


मृत्युंजय द्विवेदी ने कहा किजब ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा होती है और प्रत्येक जगह हरियाली हो जाती है , उसी प्रकार हमारे मन भी नये प्रकार के ज्ञान को ग्रहण करने की अवस्था में होता है , तथा आज ही के दिन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था । पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी सूर्यभान शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन जिला युवा भारत प्रभारी मोहन पांडेय ने किया। इस दौरान पतंजलि योग समिति के महामंत्री अजय जायसवाल , मिथिलेश यादव , मनीष आर्य , राजेश गोस्वामी , सन्तोष द्विवेदी , मुकेश गुप्ता आदि लोग उपस्थित रहे ।मधुबन में भारत  स्वाभिमान की ओर से गुरु पूर्णिमा ब्लाक भवन में मनाया गया ।
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सरसेना संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के  सरसेना स्थित श्री हरि  शंकर आश्रम धर्मार्थ ट्रस्ट पर मंगलवार को अनुयायियों का जमघट लगा रहा। अनुयायियों ने स्व. बाबा शहरिशंकर दास  जी की समाधि पर मत्था टेका।इस मौके पर  पशुपति दास जी  ने कहा की गुरु भगवान से भी बड़ा है। आज कल गांवों, बाजारों मे शिव चर्चा की  परंपरा बहुत तेजी से चल रही है। जिसमें कहा जाता है कि शिव ही गुरु है ऐसा  नहीं ,गुरु ही शिव है यह सच है क्योंकि पहले गुरु होता है फ़िर शिव आते हैं। 


उन्होंने कहा कि संत सतगुरु साधारण मनुष्यों जैसे रहते हैं परंतु  संतों और बाहर मुखी वेष धारियों मे उतना ही अन्तर है, जितना आम और बबूल के  पेड़ में एक मीठे फल देता हे दूसरा कांटे ही कांटे।  रतनपुरा संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में गुरु पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। ब्लाक मुख्यालय स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पर भगवा ध्वज को गुरु माना गया। गुरु की महिमा का बखान किया गया।
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