पंद्रह वर्ष पूर्व पुलिस कस्टडी में पेशी पर जाते समय कचहरी परिसर में हुई हत्या के मामले में अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो वीरनायक सिंह ने चार में से दो आरोपियों को दोषी पाया। कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास के साथ 15-15 हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया है। जबकि दो को संदेह का लाभ मिला, लिहाजा कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया।
शहर कोतवाली में 17 जनवरी 2001 को आरक्षी विनोद कुमार सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें विनोद ने तीन अज्ञात बदमाशों को आरोपित किया। विनोद ने रिपोर्ट में बताया कि 17 जनवरी 2001 को वह जिला जेल से हत्या के आरोपी व मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के भदीड़ गांव निवासी चंद्रजीत राजभर व एक अन्य आरोपी पंकज राय को कोर्ट में पेशी के लिए ले जा रहा था। तभी कचहरी भवन के पहले तीन अज्ञात लोग आए और चंद्रजीत राजभर को गोली मार दिए। सिपाही के अनुसार चंद्रजीत राजभर के शरीर को पार कर गोली दूसरे आरोपी पंकज राय को भी लग गई। जिससे दोनों घायल हुए। घायलों को जबतक अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई, चंद्रजीत राजभर की मौके पर मौत हो गई।
सिपाही के अनुसार उसने हमलावरों का पीछा भी किया, लेकिन वे उसके ऊपर पर भी बम से हमला किया गया। जिससे सिपाही के आंख में चोटें आई। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरु किया। इस दौरान पुलिस जांच में भदीड़ गांव निवासी सतीश सिंह, अशोक सिंह, अनिल सिंह व मंधाता सिंह का नाम प्रकाश में आया। पुलिस का तर्क था कि अशोक सिंह की पत्नी सुनीता सिंह जो गांव की प्रधान थी, उनकी हत्या में चंद्रजीत आरोपी बना था। उसी मामले में वह जेल में बंद था। साथ ही उसी मामले की पेशी में उसको कोर्ट ले जाया जा रहा था।
पुलिस ने विवेचना के बाद चारों के विरुद्ध्ा कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित की। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी दयाशंकर राय ने 16 गवाहों को पेश किया। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें रंजिशन झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों के तर्कों केे सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद एडीजे ने आरोपी सतीश सिंह व मंधाता सिंह को हत्या व हत्या का प्रयास का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद हत्या में आजीवन कारावास की सजा और दस हजार रुपया अर्थदंड तथा हत्या के प्रयास में सात वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर क्रमश: दो माह व एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।